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		<title>धूप करती है रोगों से बचाव</title>
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		<pubDate>Tue, 17 Jan 2012 09:50:52 +0000</pubDate>
		<dc:creator>hh_admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अन्य]]></category>
		<category><![CDATA[इनफेक्शन/ डिसीस]]></category>
		<category><![CDATA[बॉडी केयर / फिटनैस]]></category>
		<category><![CDATA[वुमन एंड चाइल्ड केयर]]></category>
		<category><![CDATA[स्किन केयर]]></category>
		<category><![CDATA[हेल्थ  टिप्स]]></category>
		<category><![CDATA[धूप करती है रोगों से बचाव]]></category>

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		<description><![CDATA[धूप करती है रोगों से बचाव,धूप में रहने से न डरें&#8212;भले ही आपके पास अधिक समय न हो धूप में बैठने के लिये परंतु हर रोज किसी न किसी बहाने थोडी देर अवश्य धूप लें.इससे टाईप 2 डाइबिटीस से बच सकते हैं. रंग काला  न हो जाए इस वजह से हम धूप  में बैठने से [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>धूप करती है रोगों से बचाव,धूप में रहने से न डरें&#8212;भले ही आपके पास अधिक समय न हो धूप में बैठने के लिये परंतु हर रोज किसी न किसी बहाने थोडी देर अवश्य धूप लें.इससे टाईप 2 डाइबिटीस से बच सकते हैं. रंग काला  न हो जाए इस वजह से हम धूप  में बैठने से डरते हैं, परंतु टोरंटो में हुई  स्टडी से पता चला है कि ब्रेस्ट केंसर होने का खतरा आधा कम हो सकता है.हफ्ते में 20 घंटे तो कमसे कम धूप अवश्य  लें कई तकलीफों से बचे रहेंगे.</p>
<p><strong>कैंसर से होताहै बचाव-</strong>एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ.अजय मेहरा  का  कहना है कि धूप बॉड़ी के लिये बेहद जरूरी है,कहते हैं कि दूध,फिश,एग्स से शरीर को 10% विटामिन डी मिलता है परंतु धूप से 90%  सूरज की रोशनी से मिलता है जो फूड से भी ज्यादा जरूरी है. लेबोरेट्री टेस्ट के मुताबिक ,ब्रेस्ट सेल्स में विटामिन डी को हार्मोन में तब्दील करने की क्षमता रखता है .जो एंटी कैंसर प्रॉपर्टीज बनाते हैं.एक हेल्दी  वुमन में कम सेकम 3,471ब्रेस्ट कैंसर विटामिंस होने जरूरी है यह अगर 2हजार से नीचे हो तो  कैंसर का खतरा बढ़ जाता है.जान लें कि यदि 20से 30 साल की उम्र की है, तो हफ्ते में 20 घंटे धूप बहुत जरूरी है.यदि उम्र 60 या इससे उपर की हो तो खतरा 60% कम हो जाता है.</p>
<p><strong>जॉएट पेन आमतौर पर ठंड में बढ़ जाता है </strong>उठते बैठते अक्सर जोडों में दर्द महसूस होता है.फिजियोथेरपिस्ट डॉ.चाक्षु सजेस्ट करते हैं  इस मौसम में अपनी बॉडी को गर्म रखें खुद को एक्टिव रखें.जॉएट्स को ढ़क कर रखें(वार्म कवर)जरबदस्ती अपने आप से न करें एक्सरसाइस के लिये, हां वॉक करें मगर अच्छी तरह अपने  आप को कवर कर रखें, हल्की फुल्की एकक्सरसाइस करें.</p>
<p><strong>विटमि डी बहुत जरूरी है</strong>-हर फैमिली में दूध,फिश  को रोजाना की डाइट में  शामिल  नहीं किया जाता इस कारण इस मौसम में  फिजिशियन्स अपने पेशेंट्स को विटामिन डी सप्सिमंट लेने की सलाह देते है कारण इसकी कमी से ज्वाइंट पेन तथा बोंमन्स कमजोर होने जैसी प्रोबलम्स बढ़ जाती है.ज्वाइंट पेन तथा बोंन्स कमजोर जैसे लोगों को सुबह की ठंडी हवा से बचना चाहिये घर पर ही एखक्सरसाइस करें या फिर धूप निकलने पर घर से बाहर निकलना चाहिये.</p>
<p>कुर्सी पर  बैठकर आऱाम से करसत करें,धीरे धीरे हाथ पैर को फैलाएं.गर्म पानी से नहाएं,किसी न किसी तेल की मालिश करें ताकि शरीर में गर्मी बनी  रहे.रूक रूक कर कसरत करें.</p>
<p><strong>डायबिटीस पर कंट्रोल- </strong>मेलबोर्न में की गई स्टडी से पता तला कि धूप की कमी से लोगों को टाइप 2 डायबिटीस की चपेट में आने की संभावना बढ़ जाती है.इस रिसर्च में डॉ.केन सिकरिस कहते है कि यदि शरीर में विटामिन डी के  नैनोमोल्स की संख्या प्रति   लीटर 50 से कम होती है तो उन्हें डायबिटीस का खतरा होता है,दरअसल विटामिन डी डायबिटीस होने वाले फैक्टर्स को कम करती है.मतलब धूप को किसी भी कीमत पर इग्नोर नहीं  किया जा सकता है.</p>
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		<title>धूम्रपान हो या तम्बाकू, हड्डियों को कमजोर करती है</title>
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		<pubDate>Wed, 14 Dec 2011 11:38:46 +0000</pubDate>
		<dc:creator>hh_admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अन्य]]></category>
		<category><![CDATA[आर्थराटिस]]></category>
		<category><![CDATA[हेल्थ  टिप्स]]></category>
		<category><![CDATA[धूम्रपान हो या तम्बाकू]]></category>
		<category><![CDATA[हड्डियों को कमजोर करती है]]></category>

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		<description><![CDATA[ 
धूम्रपान हो या तम्बाकू, हड्डियों को कमजोर करती है
ज्यादा धूम्रपान हो या तम्बाकू से हड्डिययों के जोड़ को मजबूत बनाए रखने वाले कंपाउमड डैमेज होने लगते हैं जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती है फ्रेक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है.और यदि फ्रेक्चर हो जाये तो हड्डियां मुश्किल से जुडती हैं या फिर हड्डियां को [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><strong> </strong></p>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;"><strong>धूम्रपान हो या तम्बाकू, हड्डियों को कमजोर करती है</strong></div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;"><strong>ज्यादा धूम्रपान हो या तम्बाकू से हड्डिययों के जोड़ को मजबूत बनाए रखने वाले कंपाउमड डैमेज होने लगते हैं जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती है फ्रेक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है.और यदि फ्रेक्चर हो जाये तो हड्डियां मुश्किल से जुडती हैं या फिर हड्डियां को जुड़ने में बहुत समय लग जाता है.इस बात का खुलासा बनारस विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. गोयल के डिस्कशन से सामने आई है.</strong></div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;"><strong>धूम्रपान  तथा तम्बाकू से होने वाले नुकसान&#8230;</strong></div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;"><strong>ओस्टियोपोरेसिस(हड्डियांकमजोर)होने का खतरा होता है</strong></div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;"><strong>धूम्रपान से हड्डियों का कैंसर होने का खतरा भी हो सकता है जो बॉडी के कैंसरों के सबसे खतरनाक कैंसरों में से एक है. हड्डियों के कैंसर का पता बहुत देर में पता चलता है</strong></div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;"><strong>खाने में कुछ भी खा लो हजम नहीं होताहै.हमेशा पेट खराब रहता है जिसकी वजह से कितना भी प्रोटीन तथा कैल्शियम का सेवन करें बॉड़ी को लगता ही नहीं.</strong></div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;"><strong>ऐसे रहेंगी हड्डियां मजबूत&#8230;.</strong></div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;"><strong>हड्डियों के लिये धूप जरूरी है जिससे विटामिन डी मिलता है जो हमारी हड्डियों को मजबूज बनाती है</strong></div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;"><strong>मिल्क प्रोडेक्ट का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें</strong></div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;"><strong>डॉक्टर की एडवाइस से एक्सरसाइस करें</strong></div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;"><strong>खाने में अधिक से अधिक मात्रा में प्रोटीन का सेवन करें</strong></div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;"><strong>धूम्रपान तथा तम्बाकू से बचें.</strong></div>
<p><strong> </strong></p>
<div></div>
<div></div>
<div><strong>धूम्रपान हो या तम्बाकू, हड्डियों को कमजोर करती है</strong></div>
<div><strong><br />
</strong></div>
<div><img class="alignright size-full wp-image-2397" style="border-style: initial; border-color: initial;" title="images (1)" src="http://healandhealth.com/hi/wp-content/uploads/2011/12/images-1.jpg" alt="images (1)" width="78" height="78" /></div>
<div><strong><br />
</strong></div>
<div><strong><br />
</strong></div>
<div>ज्यादा धूम्रपान हो या तम्बाकू से हड्डिययों के जोड़ को मजबूत बनाए रखने वाले कंपाउमड डैमेज होने लगते हैं जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती है फ्रेक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है.और यदि फ्रेक्चर हो जाये तो हड्डियां मुश्किल से जुडती हैं या फिर हड्डियां को जुड़ने में बहुत समय लग जाता है.इस बात का खुलासा बनारस विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. गोयल के डिस्कशन से सामने आई है.</div>
<div><strong><br />
</strong></div>
<div><strong><strong>धूम्रपान  तथा तम्बाकू से होने वाले नुकसान&#8230;</strong></strong></div>
<div>
<ul>
<li>ओस्टियोपोरेसिस(हड्डियांकमजोर)होने का खतरा होता है</li>
<li>धूम्रपान से हड्डियों का कैंसर होने का खतरा भी हो सकता है जो बॉडी के कैंसरों के सबसे खतरनाक कैंसरों में से एक है. हड्डियों के कैंसर का पता बहुत देर में पता चलता है</li>
<li>खाने में कुछ भी खा लो हजम नहीं होताहै.हमेशा पेट खराब रहता है जिसकी वजह से कितना भी प्रोटीन तथा कैल्शियम का सेवन करें बॉड़ी को लगता ही नहीं.</li>
</ul>
</div>
<div><strong>ऐसे रहेंगी हड्डियां मजबूत&#8230;.</strong></div>
<div><strong><strong><br />
</strong></strong></div>
<div>
<ul>
<li>हड्डियों के लिये धूप जरूरी है जिससे विटामिन डी मिलता है जो हमारी हड्डियों को मजबूज बनाती है</li>
<li>मिल्क प्रोडेक्ट का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें</li>
<li>डॉक्टर की एडवाइस से एक्सरसाइस करें</li>
<li>खाने में अधिक से अधिक मात्रा में प्रोटीन का सेवन करें</li>
<li>धूम्रपान तथा तम्बाकू से बचें.</li>
</ul>
</div>
<div><strong><br />
</strong></div>
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		<title>सुबह का कश, हो सकता है दिल का खतरा</title>
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		<pubDate>Thu, 08 Dec 2011 06:51:00 +0000</pubDate>
		<dc:creator>hh_admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अन्य]]></category>
		<category><![CDATA[हर्टप्रोब्लम/ ब्लड़प्रेशर]]></category>
		<category><![CDATA[हार्ट प्रोब्लम]]></category>
		<category><![CDATA[हेल्थ  टिप्स]]></category>
		<category><![CDATA[सिगरेट के अत्याधिक कश से सेहत पर  खतरा]]></category>

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		<description><![CDATA[सुबह का कश हो सकता है दिल के लिये खतरा
सुबह की चाय की तरह आप सुबह सिगरेट का कश भी लेने लगे तो दिल की बीमारी को चार गुणा बढा़ देते हैं.हार्ट यूएस जर्नल ऑफ मेडिकल के अंक में इस बात का खुलासा हुआ है. सुबह की शुरूआत कश के साथ की जाये तो फेफड़े [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">सुबह का कश हो सकता है दिल के लिये खतरा</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">सुबह की चाय की तरह आप सुबह सिगरेट का कश भी लेने लगे तो दिल की बीमारी को चार गुणा बढा़ देते हैं.हार्ट यूएस जर्नल ऑफ मेडिकल के अंक में इस बात का खुलासा हुआ है. सुबह की शुरूआत कश के साथ की जाये तो फेफड़े के केंसर की संभावना बढ़ जाती है.हार्ट केयर ऑफ इंडिया के प्रमुख डॉ. अग्रवाल कहते हैं कि सुबह उठने के आधे घंटे के भीतर ली गई सिगरेट की कश रक्तचाप को बढ़ा देती है,सुबह की कश दस से पंद्रह मिनट में रक्तचाप को दोगुनी बढ़ा देती है, सिगरेट पीने वाले सर्दियों में इसकी मात्रा दोगुनी कर देते हैं.युवाओं में इसी कारण रक्तचाप बढ़ता जा रहा है.लंबे समय से यही आदत के बने रहने से इसका असर सबसे पहले निमोनिया के रूप में दिखाई पड़ता है.दिल्ली डायबिटिक रिसर्च केंन्द्र के डॉ.ए के झिंगन कहते हैं कि उठने के तुरंत बाद सिगरेट के आदी लोगों को हार्डकोर स्मोकर  के रूप में जाना जाता है जो सामान्य सिगरेट स्मोकर की अपेक्षा खतरे के अधिक करीब होते हैं. सुबह की शुरूआत  का कश फेफड़े में जमकर निमोनिया  का कारण बन सकता है.सिगरेट स्मोकर्स को काउंसलिग के जरिये सलाह दी जाती है,विकल्प के तौर पर ब्लैक टी,या एरोमा टी ले सकते हैं .</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">सिगरेट के अत्याधिक कश से सेहत पर  खतरा</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">सुबह का कश डायलोस्टिक यानि उच्चरक्त चाप 6 एमएमएचजी तक बढ़ सकता है.</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">सिगरेट का कश सात सेकेंड में मस्तिष्क तक पहुंच जाता है.</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">सिगरेट सेवन के एक सेकेंड के अंदर ही 4800 से अधिक टॉक्सिक तत्व रक्त में घुल जाते हैं</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">नियमित पांच सिगरेट का सेवन छ महीने के अंदर इंसान की आवाज को अक्सर बदल देती है.</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">छ महीने तक लगातार सिगरेट का सेवन, युवाओं में दिल की एंजाइना बीमारी के रूप में दिखने लगती है.</div>
<div><strong>सुबह का कश हो सकता है दिल के लिये खतरा</strong></div>
<div><strong>सुबह की चाय की तरह आप सुबह सिगरेट का कश </strong>भी लेने लगे तो दिल की बीमारी को चार गुणा बढा़ देते हैं.हार्ट यूएस जर्नल ऑफ मेडिकल के अंक में इस बात का खुलासा हुआ है. सुबह की शुरूआत कश के साथ की जाये तो फेफड़े के केंसर की संभावना बढ़ जाती है.हार्ट केयर ऑफ इंडिया के प्रमुख डॉ. अग्रवाल कहते हैं कि सुबह उठने के आधे घंटे के भीतर ली गई सिगरेट की कश रक्तचाप को बढ़ा देती है,सुबह की कश दस से पंद्रह मिनट में रक्तचाप को दोगुनी बढ़ा देती है, सिगरेट पीने वाले सर्दियों में इसकी मात्रा दोगुनी कर देते हैं.युवाओं में इसी कारण रक्तचाप बढ़ता जा रहा है.लंबे समय से यही आदत के बने रहने से इसका असर सबसे पहले निमोनिया के रूप में दिखाई पड़ता है.दिल्ली डायबिटिक रिसर्च केंन्द्र के डॉ.ए के झिंगन कहते हैं कि उठने के तुरंत बाद सिगरेट के आदी लोगों को हार्डकोर स्मोकर  के रूप में जाना जाता है जो सामान्य सिगरेट स्मोकर की अपेक्षा खतरे के अधिक करीब होते हैं. सुबह की शुरूआत  का कश फेफड़े में जमकर निमोनिया  का कारण बन सकता है.सिगरेट स्मोकर्स को काउंसलिग के जरिये सलाह दी जाती है,विकल्प के तौर पर ब्लैक टी,या एरोमा टी ले सकते हैं .</div>
<div><strong>सिगरेट के अत्याधिक कश से सेहत पर  खतरा</strong></div>
<div>
<ul>
<li>सुबह का कश डायलोस्टिक यानि उच्चरक्त चाप 6 एमएमएचजी तक बढ़ सकता है.</li>
<li>सिगरेट का कश सात सेकेंड में मस्तिष्क तक पहुंच जाता है.</li>
<li>सिगरेट सेवन के एक सेकेंड के अंदर ही 4800 से अधिक टॉक्सिक तत्व रक्त में घुल जाते हैं</li>
<li>नियमित पांच सिगरेट का सेवन छ महीने के अंदर इंसान की आवाज को अक्सर बदल देती है.</li>
<li> छ महीने तक लगातार सिगरेट का सेवन, युवाओं में दिल की एंजाइना बीमारी के रूप में दिखने लगती है.</li>
</ul>
</div>
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		<title>फास्ट(व्रत) में भी  रखें सेहत का ख्याल</title>
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		<pubDate>Mon, 03 Oct 2011 08:44:11 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Padma</dc:creator>
				<category><![CDATA[रेसिपी]]></category>
		<category><![CDATA[फास्ट में भी  रखें सेहत का ख्याल]]></category>

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		<description><![CDATA[फास्ट  तो साल भर चलता रहता है, इस में भी सेहत का ख्याल रखना होगा,कारण
इसका असर  हमारी दैनिक सेहत पर  पड़ सकता है


सिंघाड़ा- व्रत में लोग सिंघाडे का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं ।सिंघाड़े की तासीर ठंडी होती है जो शरीर को फायदा पहुंचाती है। बारिश का मौसम   अपने साथ तमाम बीमारियां लेकर आता है [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div><strong><span style="font-weight: bold;">फास्ट  तो साल भर चलता रहता है, इस </span>में भी सेहत का ख्याल रखना होगा,कारण</strong></div>
<div><strong>इसका असर  हमारी दैनिक सेहत पर  पड़ सकता है</strong></div>
<div></div>
<div></div>
<div><strong>सिंघाड़ा</strong>- व्रत में लोग सिंघाडे का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं ।सिंघाड़े की तासीर ठंडी होती है जो शरीर को फायदा पहुंचाती है। बारिश का मौसम   अपने साथ तमाम बीमारियां लेकर आता है यदि आप वॉटर डिसीज से घिर गए हों तो सिंघाडा आटा में शक्कर मिलाकर  पानी में घोल कर    पिएं जिससे तकलीफ दूर होगी।इसके साथ -साथ गले में खराश और कफ से भी  आराम मिलेगा।</div>
<div>पीलिया के मरीजों के लिए यह फायदेमंद है-सिंघाड़े के जूस से नॉसिया(मिचली) और अपच से आराम मिलेगा।</div>
<div></div>
<div><strong>सिंघाडा</strong> ज्यादातर कच्च ही खायें तो अच्छा है कारण सिंघाड़े में पाय जाने वाले न्यूट्रिशियन्स- फाइबर,विटामिन बी -6, पोटेशियम,कॉपर ,मैंगनीज तथा पानी की मात्रा भी अधिक होती है जिनकी हमारे शरीर को सख्त जरूरत होती है। इसे तो स्नैक्स की तरह या फिर सलाद की तरह भी खाया जा सकता है । वरना हल्का सा उबालकर और नमक लगाकर इसका स्वाद ले सकते हैं।</div>
<div>यह ऊर्जा का अच्छा स्रोत है, इसे सुखा और पीसकर आटा बना लें और रोटी या पूरी बनाकर खाएं।    इसकी गिनती फल होने के कारण उपवास रखने वाले लोग इसका ज्यादा उपयोग करते हैं।</div>
<div>इसे निश्चित मात्रा में या फिर ताजा न खाने पर इससे गैस बनने की शिकायत हो सकती है</div>
<div>फास्ट एंड फीस्ट (व्रत में भी रखें सेहत का ख्याल)</div>
<div><img class="alignright size-full wp-image-2371" title="images-43 चाट" src="http://healandhealth.com/hi/wp-content/uploads/2011/10/images-43-चाट.jpg" alt="images-43 चाट" width="115" height="80" /></div>
<div></div>
<div></div>
<div></div>
<div><strong>सिंघाड़े की चाट.</strong>..</div>
<div><strong>सामग्री :</strong></div>
<div>सिंघाड़ा 250 ग्राम, रिफाइंड  तेल,  छोटा चम्मच, नींबू का रस एक छोटा चम्मच, चाट मसाला एक छोटा चम्मच, सेंधा नमक ,स्वादानुसार हरी मिर्च,लाल मर्च, हरा धनिया,एक चुटकी हींग।</div>
<div></div>
<div><strong>विधि </strong>:</div>
<div>सिंघाड़ों का छिलका निकालें एक सीटी तक इन्हें सिर्फ भाप में पकाएँ। इसमें पानी न डालें। इसके छोटे-छोटे टुकड़े कर लें। अब पैन में तेल गरम कर जीरा, हींग, हरी मिर्च का तड़का लगाकर कटे सिंघाड़े तलें।</div>
<div>नमक, लालमिर्च, धनिया पावडर डालकर दो मिनट ढँककर सेंकें। सर्व करते समय नींबू का रस, चाट मसाला,डालकर  गरमा</div>
<div>गरम परोसें। सिंघाड़ा चाट पेश है।</div>
<div><strong><br />
</strong></div>
<div></div>
<div></div>
<div></div>
<div></div>
<div></div>
<div></div>
<div><strong>पनीर के पकौडे</strong>&#8230;</div>
<p><strong><a rel="attachment wp-att-2373" href="http://healandhealth.com/hi/%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%96%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%b9/images-9-150x150/"><img class="alignright size-full wp-image-2373" style="border-style: initial; border-color: initial;" title="images-9-150x150" src="http://healandhealth.com/hi/wp-content/uploads/2011/10/images-9-150x150.jpg" alt="images-9-150x150" width="77" height="77" /></a></strong></p>
<div><strong>सामग्री :</strong></div>
<div>सौ ग्राम पनीर, एक कप सिंघाड़े का आटा, स्वादानुसार सेंधा नमक एवं पिसी कालीमिर्च, एक चुटकी जीरा पावडर,  हरी मिर्च बारीक कटी ,थोडा सा हरा धनिया कटा ,तेल अंदाज से।</div>
<div><strong>विधि :</strong></div>
<div>पनीर को चौकोर टुकड़ों में काट लें। सिंघाड़े के आटे में तेल छोड़कर अन्य सामग्री मिलाएँ एवं पर्याप्त पानी डालकर गाढ़ा घोल बना लें। कड़ाही में तेल गर्म करें। अब पनीर के टुकड़ों को सिंघाड़े के घोल में डुबोकर गर्म तेल में सुनहरे भूरे होने तक तल लें।  पनर पकौड़ा तैयार है। इन्हें हरी चटनी के साथ गर्मागर्म पेश करेंहरा धनिया डालें और</div>
<div><img class="alignright size-thumbnail wp-image-2374" title="images (11)" src="http://healandhealth.com/hi/wp-content/uploads/2011/10/images-11-144x150.jpg" alt="images (11)" width="92" height="96" /></div>
<div><strong>लो   कैलोरी ग्रीन बूस्टर  जूस.</strong>..</div>
<div><strong>सामग्री :</strong> एक कटोरी कटा खीरा, आधा कटोरी कटा हरा धनिया, आधा कटोरी पुदीना पत्ती, दस तुलसी पत्ती, एक कटोरी  किशमिश, एक  कप नारियल  दूध, नमक व चीनी स्वादानुसार।</div>
<div><strong>विधि</strong> : किशमिश को साफ करके धोकर पानी में भिगो दें। एक  कप पानी केसाथ मिक्सी में पीस लें और छान लें। सारी सामग्री को मिलाकर ब्लैंडर में ब्लैंड करें और छानकर फ्रिज में रखें ठंडा करके सर्व करें। तुलसी या   पुदीना पत्ती से सजाएँ और साथ नींबू पीस लगाकर सजाएं, हो गया और अब लें  रिच ग्रीन बूस्टर का आनंद लें।</div>
<div><strong><br />
</strong></div>
<div></div>
<div></div>
<div></div>
<div></div>
<div><img class="alignright size-full wp-image-2375" title="images-35-150x150 (1)" src="http://healandhealth.com/hi/wp-content/uploads/2011/10/images-35-150x150-1.jpg" alt="images-35-150x150 (1)" width="77" height="77" /></div>
<div><strong>लो कैलोरी पराठा</strong></div>
<p><strong>सामग्री :</strong> एक छोटी लौकी, आधा कटोरी सिंघाडे का आटा, पाव चम्मच काली मिर्च, आधा चम्मच लाल मिर्च पावडर, चुटकी भर हल्दी व हींग, नमक स्वादानुसार, हरा धनिया।</p>
<div><strong>विधि </strong>: सिंघाडे के आटे को गूँध लें। लौकी को छीलकर कद्दूकस करके  दबाकर उसका अतिरिक्त पानी निकाल लें और उपरोक्त मसाला सामग्री मिला लें। अब आटे की छोटी लोई लेकर उसकी दो अलग-अलग रोटी बेल लें। एक रोटी पर जरूरतानुसार मसाला रखें और दूसरी रोटी उसके उपर रखकर हाथ से चिपका कर बेल लें। दें। गरम तवे पर रोटी को दोनों तरफ से पराठे की तरह सेंक लें नॉन स्टिक तवे पर चाहे तो रोटी पर तेल लगाएँ अन्यथा नहीं अब मनचाही चटनी के साथ परोसें।</div>
<div></div>
<div></div>
<div><strong>साबूदानेकी खिचडी.</strong>..</div>
<p><strong> <a rel="attachment wp-att-2379" href="http://healandhealth.com/hi/%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%96%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%b9/images-14-4/"><img class="alignright size-full wp-image-2379" title="images (14)" src="http://healandhealth.com/hi/wp-content/uploads/2011/10/images-14.jpg" alt="images (14)" width="89" height="66" /></a>सामाग्री</strong></p>
<div>साबूदाना</div>
<div>उबले आलू</div>
<div>मूंगफल्ली दाना</div>
<div>नमक(व्रत वाला या दूसरा)</div>
<div>सरसों दाना</div>
<div>कटी हरी मिर्च</div>
<div>अदरक</div>
<div><strong>विधि</strong> &#8211; एक कटोरी साबूदाने को आधा कटोरी से थोड़े कम पानी में भिगोएँ । चार पाँच घंटे भीगने दें ।इसमें स्वादानुसार व्रत वाला नमक   (या रोज खाने वाला)भी मिलादें।अब एक कटोरी कच्ची मूँगफली को मोटे तले वाली कड़ाही में कम आँच में बराबर चलाते हुए भून लें  मूँगफली जलनी या काली नहीं होने देनी चाहिये । भुन जाने पर ठंडी होने दें ।फिर छिलके उतर दें सूप या थाली में डाल फटककर छिलके हटा लें । अब इन्हें दरदरा पीस लें । जब साबूदाना भीगकर नरम हो जाए तो उसमें यह मूँगफली पावडर मिला लें ।उबले आलू के छोटे-छोटे टुकडे कर के थोडा तल लें। नमक ,मिर्च, अमचूर कटी अदरक या चाटमसाला मिला लें । एक कड़ाही में तीन बड़े चम्मच तेल गरम करने रखें, दो तीन सूखी लाल मिर्च बीच में से दो टुकड़े कर तेल में डालकर भून लें गरम तेल में सरसों,  करी पत्ता का तडका देंऔर साबूदाने का मिश्रण डालकर चलाएँ । बीच बीच में पलटते रहें । ढक्कन ना लगाएँ । करीब दस मिनट में पक जाने परसाबूदाना पारदर्शी हो जायेगा आग से उतार लें । खाने से पहले भूनी मिर्च डाल</div>
<div></div>
<div></div>
<div></div>
<div><img class="size-full wp-image-2380 alignright" title="images-55-150x150" src="http://healandhealth.com/hi/wp-content/uploads/2011/10/images-55-150x150.jpg" alt="images-55-150x150" width="77" height="77" /></div>
<div></div>
<div></div>
<div><strong>कम कैलोरी वाली फलों की चाट..</strong></div>
<div><strong> विधि- </strong> सेब, केले, अमरूद, के छोटे छोटे टुकड़े कर लीजिये । सबको एक बर्तन में डालकर नमक, (व्रत वाला), मिर्च,शक्कर या शूगर फ्री      मिला दीजिये । नींबू का रस निचोड़ कर</div>
<div>अच्छे से मिला लीजिये अब चाहें तो संतरे का केसर और अंगूर पूरे या काटकर आधे करके    डाल दीजिये आप चाहें तो इसमें योगर्ड (मीठी दही)डालकर फ्रिज में रखिये यदि व्रत का है तो इसमें शहद डालकर भी बना सकते  हैंयदि कैलोही का प्रोबलम न हो तो ।दो घंटे बाद काफी रसीला बन जाएगा तब खाइये यदि कोई भी इनमें से कुछ भी बनाए व पसन्द  आये तो मुझे बताना ना भूलियेगा</div>
]]></content:encoded>
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		<item>
		<title>कंजक्टिवाइटिस(आई फ्लू)</title>
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		<pubDate>Thu, 15 Sep 2011 08:48:05 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Padma</dc:creator>
				<category><![CDATA[आई केयर]]></category>
		<category><![CDATA[इनफेक्शन/ डिसीस]]></category>
		<category><![CDATA[बॉडी केयर / फिटनैस]]></category>
		<category><![CDATA[कंजक्टिवाइटिस(आई फ्लू)]]></category>

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		<description><![CDATA[हर बारिश के मौसम में या फिर ठीक इसके बाद आंखों की बीमारी कंजक्टिवाइटिस(आई इंफेक्शन) का प्रकोप देखने को मिलता ही है.चिकित्सकों के अनुसार इस बीमारी में कुछ  बातों का खयाल रखा जाय तो इससे बचाव अवश्य हो सकता है
कंजक्टिवाइटिस, आजकल का मौसम तेज धूप के बाद बारिष और उसके बाद फिर तेज धूप का [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">हर बारिश के मौसम में या फिर ठीक इसके बाद आंखों की बीमारी कंजक्टिवाइटिस(आई इंफेक्शन) का प्रकोप देखने को मिलता ही है.चिकित्सकों के अनुसार इस बीमारी में कुछ  बातों का खयाल रखा जाय तो इससे बचाव अवश्य हो सकता है</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">कंजक्टिवाइटिस, आजकल का मौसम तेज धूप के बाद बारिष और उसके बाद फिर तेज धूप का असर हमारी आंखों पर सीधा पड़ता है.</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">आंख हमारे शरीर का सबसे नाजुक और संवेदनशील अंग है। इसलिए इनकी देखभाल में सबसे ज्यादा सावधानी की जरूरत होती है। खासतौर पर बारिश के मौसम में। बारिश का मौसम कंजक्टिवाइटिस के लिए सबसे सही समय होता है।  प्रभावित व्यक्ति को हर समय यही लगता रहता है कि उसकी आंख में रेत जैसा कुछ गड़ रहा है। इस मौसम में थोड़ी सी लापरवाही आंखों को काफी नुकसान पहुंचा सकती है। आंखों को रगडे नहीं.</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">कंजक्टिवाइटिस बैक्टीरिया, वायरल इंफेक्शन यह एक या दोनों आखों में हो सकती है। इसमें आखों में खुजली, उनका लाल हो जाना, पानी बहना और आखों में सूजन आ जाती है। यह बीमारी एक आख से शुरू होकर दूसरे में पहुंचती है। आंख रोग विशेषज्ञ चिकित्सक डा. सुनील कुमार बताते हैं कि कंजक्टिवाइटिस दो प्रकार का होता है।</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">कंजक्टिवाइटिस यह तापमान के तेजी से बदलने यानी ज्यादा या कम होने पर होता है। हालाकि यह अपने आप चार-पाच दिनों में ठीक हो जाता है। दूसरा है बैक्टीरियल कंजक्टिवाइटिस। यह बच्चों को जल्द गिरफ्त में ले लेता है।</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">. जुलाई से सितंबर तक का मौसम आंखों के प्रतिकूल होता है। नेत्र विशेषज्ञ डा. अतुल सूद कहते हैं, कि बरसात का मौसम और तेज धूप के साथ उमस भरी गर्मी से वातावरण चारों ओर से प्रदूषित हो जाता है।</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">बरसात के बाद जब धूप निकलती है, तो जलभराव वाले स्थान सूखने लगते हैं। इस दौरान गंदगी वाले  स्थानों से हवा के साथ कण भी उड़ते हैं। जिसके चलते आखों में वायरल इंफेक्शन हो सकता है। यह</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">मौसम वैक्टीरिया और वायरल के लिए एकदम अनुकूल है।</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">कंजंक्टिवाइटिस को बोलचाल की भाषा में आंख आना कहते हैं। इसकी वजह से आंखें लाल, सूजन युक्त, चिपचिपी [कीचड़युक्त] होने के साथ-साथ उसमें बाल जैसी चुभने की समस्याएं हो सकती हैं। आमतौर पर बैक्टीरिया या वायरस के इंफेक्शन अथवा एलर्जी के कारण यह तकलीफ होती है।</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">प्रमुख तीन प्रकार के इंफक्शन होते हैं</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस :दोनों आंखों से बहुत अधिक कीचड़ आना।</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">समाधान — डॉक्टरी सलाह से एंटीबायोटिक ड्रॉप्स या ऑइंटमेंट का इस्तेमाल करें।</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">वायरल कंजंक्टिवाइटिस: कीचड़युक्त पानी काम आना, एक आंख से पानी आना।</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">समाधान— गुनगुने या फिर नमक मिले पानी अथवा बोरिक एसिड पाउडर से दिन में कई बार आंखों को धोएं। डॉक्टरी सलाह लें।</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस: दोनों आंखों से पानी आना, खुजली होना और लाली आना</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">समाधानी— वायरल कंजंक्टिवाइटिस में बताए उपायों पर अमल करें।</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">बैक्टीरियल और वायरल कंजंक्टिवाइटिस बहुत तेजी से फैलने वाला रोग है।</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">कंजक्टिवाइटिस की पहचान</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">• सबसे आम लक्षण है आंखों में जलन और रेत कणों के अंदर होने का एहसास होना। अंदरुनी पलके और आंखों के किनारे तक लाल सुर्ख हो जाती हैं। आंखों से लगातार पानी भी गिरता है। सुबह सोकर उठने पर दोनों पलकें आपस में चिपकी हुई मिल सकती हैं। कई लोगों की आंखें सूज जाती हैं और वे तेज रोशनी के प्रति संवेदनशील हो जाती हैं।</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">इन बातों का रखें ख्याल</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">• कंजक्टिवाइटिस होने पर डाक्टर की सलाह जरूर लें। आखों को दिन में तीन से चार बार धोएं। घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाए डाक्टर की सलाह लें। याद रखें समय पर इसका इलाज नहीं किया गया तो कार्निया में जख्म हो सकता है जो घातक साबित हो सकता है। कंजक्टिवाइटिस संक्रामक बीमारी है। यानी सम्पर्क में आने पर यह एक व्यक्ति से दूसरे में फैलती है।</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">• परिवार में जो व्यक्ति संक्रमित है, उसका सामान अलग रखें। आंखों को साफ करने के लिए साफ तौलिया या रुमाल का इस्तेमाल करें। घर के बाहर निकलने से पहले धूप का चश्मा लगाएं। यह न सिर्फ धूप से बचाता है बल्कि धुंए और गंदगी से होने वाली एलर्जी से भी रक्षा करता है। आखों में दवा डालने के पहले और बाद में हाथों को अच्छी तरह धो लें। बार-बार अपनी आखों को हाथ से न छुएं। आंखों को हमेशा साफ और ठंडे पानी से धोएं</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">कम रोशनी में पढ़ाई न करें। आख में कुछ गिर जाने पर उसे मले नहीं। उसे साफ पानी से धुले। आराम न मिले तो तुरंत चिकित्सक की सलाह लें।</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">लक्षण -</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">वायरल कंजंक्टिवाइटिस- आंख में पानी आना,इरिटेशन होना,आंखे लाल होना,आमतौर पर एक आंख से शुरू होता है और दूसरी आंख में भी आसानी से हो जाता है.</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस- इसमें आखों से लगातार आंसू आना,इचिंग होना तथा सूजन रहती है.</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस-आंखों में सूजन ,पानी आना,  लाल होना सुबह आंखों का चिपक जाना</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">आमतौर पर इनका कोई इलाज नहीं होता यह एक कॉमन कोल्ड की तरह ही होता है आई ड्रॉप इस्तमाल करें.</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">बचाव के उपाय</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">आई फ्लू होने पर चश्मे का प्रयोग करें।</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">किसी व्यक्ति से हाथ नहीं मिलाना चाहिए।</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">आंखों को हाथ से नहीं रगड़ना चाहिए।</div>
<div><strong>हर बारिश के मौसम में या फिर ठीक इसके बाद आंखों की बीमारी कंजक्टिवाइटिस(आई इंफेक्शन) का प्रकोप देखने को मिलता ही है.चिकित्सकों के अनुसार इस बीमारी में कुछ  बातों का खयाल रखा जाय तो इससे बचाव अवश्य हो सकता है</strong></div>
<div></div>
<div><img class="alignright size-full wp-image-2369" style="border-style: initial; border-color: initial;" title="images (52)" src="http://healandhealth.com/hi/wp-content/uploads/2011/09/images-52.jpg" alt="images (52)" width="88" height="56" /></div>
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<div><strong>कंजक्टिवाइटिस</strong>, आजकल का मौसम तेज धूप के बाद बारिष और उसके बाद फिर तेज धूप का असर हमारी आंखों पर सीधा पड़ता है.</div>
<div>आंख हमारे शरीर का सबसे नाजुक और संवेदनशील अंग है। इसलिए इनकी देखभाल में सबसे ज्यादा सावधानी की जरूरत होती है। खासतौर पर बारिश के मौसम में। बारिश का मौसम कंजक्टिवाइटिस के लिए सबसे सही समय होता है।  प्रभावित व्यक्ति को हर समय यही लगता रहता है कि उसकी आंख में रेत जैसा कुछ गड़ रहा है। इस मौसम में थोड़ी सी लापरवाही आंखों को काफी नुकसान पहुंचा सकती है। आंखों को रगडे नहीं.</div>
<div>कंजक्टिवाइटिस बैक्टीरिया, वायरल इंफेक्शन यह एक या दोनों आखों में हो सकती है। इसमें आखों में खुजली, उनका लाल हो जाना, पानी बहना और आखों में सूजन आ जाती है। यह बीमारी एक आख से शुरू होकर दूसरे में पहुंचती है। आंख रोग विशेषज्ञ चिकित्सक डा. सुनील कुमार बताते हैं कि कंजक्टिवाइटिस दो प्रकार का होता है।</div>
<div>कंजक्टिवाइटिस यह तापमान के तेजी से बदलने यानी ज्यादा या कम होने पर होता है। हालाकि यह अपने आप चार-पाच दिनों में ठीक हो जाता है। दूसरा है बैक्टीरियल कंजक्टिवाइटिस। यह बच्चों को जल्द गिरफ्त में ले लेता है।</div>
<div>. जुलाई से सितंबर तक का मौसम आंखों के प्रतिकूल होता है। नेत्र विशेषज्ञ डा. अतुल सूद कहते हैं, कि बरसात का मौसम और तेज धूप के साथ उमस भरी गर्मी से वातावरण चारों ओर से प्रदूषित हो जाता है।</div>
<div>बरसात के बाद जब धूप निकलती है, तो जलभराव वाले स्थान सूखने लगते हैं। इस दौरान गंदगी वाले  स्थानों से हवा के साथ कण भी उड़ते हैं। जिसके चलते आखों में वायरल इंफेक्शन हो सकता है। यह</div>
<div>मौसम वैक्टीरिया और वायरल के लिए एकदम अनुकूल है।</div>
<div>कंजंक्टिवाइटिस को बोलचाल की भाषा में आंख आना कहते हैं। इसकी वजह से आंखें लाल, सूजन युक्त, चिपचिपी [कीचड़युक्त] होने के साथ-साथ उसमें बाल जैसी चुभने की समस्याएं हो सकती हैं। आमतौर पर बैक्टीरिया या वायरस के इंफेक्शन अथवा एलर्जी के कारण यह तकलीफ होती है।</div>
<div><strong>प्रमुख तीन प्रकार के इंफक्शन होते हैं</strong></div>
<div><strong>बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस</strong> -दोनों आंखों से बहुत अधिक कीचड़ आना।</div>
<div><strong>समाधान </strong>— डॉक्टरी सलाह से एंटीबायोटिक ड्रॉप्स या ऑइंटमेंट का इस्तेमाल करें।</div>
<div><strong>वायरल कंजंक्टिवाइटिस-</strong> कीचड़युक्त पानी काम आना, एक आंख से पानी आना।</div>
<div><strong>समाधान</strong>— गुनगुने या फिर नमक मिले पानी अथवा बोरिक एसिड पाउडर से दिन में कई बार आंखों को धोएं। डॉक्टरी सलाह लें।</div>
<div><strong>एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस:</strong> दोनों आंखों से पानी आना, खुजली होना और लाली आना</div>
<div><strong>समाधान</strong>— वायरल कंजंक्टिवाइटिस में बताए उपायों पर अमल करें।</div>
<div>बैक्टीरियल और वायरल कंजंक्टिवाइटिस बहुत तेजी से फैलने वाला रोग है।</div>
<div><strong>कंजक्टिवाइटिस की पहचान</strong></div>
<div>• सबसे आम लक्षण है आंखों में जलन और रेत कणों के अंदर होने का एहसास होना। अंदरुनी पलके और आंखों के किनारे तक लाल सुर्ख हो जाती हैं। आंखों से लगातार पानी भी गिरता है। सुबह सोकर उठने पर दोनों पलकें आपस में चिपकी हुई मिल सकती हैं। कई लोगों की आंखें सूज जाती हैं और वे तेज रोशनी के प्रति संवेदनशील हो जाती हैं।</div>
<div>इन बातों का रखें ख्याल</div>
<div>• कंजक्टिवाइटिस होने पर डाक्टर की सलाह जरूर लें। आखों को दिन में तीन से चार बार धोएं। घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाए डाक्टर की सलाह लें। याद रखें समय पर इसका इलाज नहीं किया गया तो कार्निया में जख्म हो सकता है जो घातक साबित हो सकता है। कंजक्टिवाइटिस संक्रामक बीमारी है। यानी सम्पर्क में आने पर यह एक व्यक्ति से दूसरे में फैलती है।</div>
<div>• परिवार में जो व्यक्ति संक्रमित है, उसका सामान अलग रखें। आंखों को साफ करने के लिए साफ तौलिया या रुमाल का इस्तेमाल करें। घर के बाहर निकलने से पहले धूप का चश्मा लगाएं। यह न सिर्फ धूप से बचाता है बल्कि धुंए और गंदगी से होने वाली एलर्जी से भी रक्षा करता है। आखों में दवा डालने के पहले और बाद में हाथों को अच्छी तरह धो लें। बार-बार अपनी आखों को हाथ से न छुएं। आंखों को हमेशा साफ और ठंडे पानी से धोएं</div>
<div>कम रोशनी में पढ़ाई न करें। आख में कुछ गिर जाने पर उसे मले नहीं। उसे साफ पानी से धुले। आराम न मिले तो तुरंत चिकित्सक की सलाह लें।</div>
<div><strong> लक्षण -</strong></div>
<div><strong>वायरल कंजंक्टिवाइटिस-</strong> आंख में पानी आना,इरिटेशन होना,आंखे लाल होना,आमतौर पर एक आंख से शुरू होता है और दूसरी आंख में भी आसानी से हो जाता है.</div>
<div><strong>एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस</strong>- इसमें आखों से लगातार आंसू आना,इचिंग होना तथा सूजन रहती है.</div>
<div><strong>बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस</strong>-आंखों में सूजन ,पानी आना,  लाल होना सुबह आंखों का चिपक जाना</div>
<div>आमतौर पर इनका कोई इलाज नहीं होता यह एक कॉमन कोल्ड की तरह ही होता है आई ड्रॉप इस्तमाल करें.</div>
<div><strong><br />
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<div><strong>बचाव के उपाय</strong></div>
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<ul>
<li>आई फ्लू होने पर चश्मे का प्रयोग करें।</li>
<li> किसी व्यक्ति से हाथ नहीं मिलाना चाहिए।</li>
<li> आंखों को हाथ से नहीं रगड़ना चाहिए।</li>
<li> यदि बच्चों के आंख में हो गया हो, तो उसे स्कूल नहीं भेजना चाहिए।</li>
<li> आंखों को तीन-चार बार गुनगुने पानी से धोना चाहिए।</li>
<li> तीन-चार दिन रोगी को आराम करना चाहिए धूप में बाहर न निकलें।</li>
<li>हाथों को बार बार साबुन से धोय</li>
<li>किसी भी संक्रमक चीज को छूने के बाद जैसे(फोन ,टीवी रिमोट,दरवाजे इत्यादि )छूने पर हाथ धोकर ही खाना खायें</li>
<li>इस सीजन में स्वीमिंग करने से बचें.</li>
</ul>
</div>
</div>
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