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		<title>विश्व स्वास्थ्य दिवस</title>
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		<pubDate>Wed, 04 Apr 2012 08:41:27 +0000</pubDate>
		<dc:creator>hh_admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[अन्य]]></category>
		<category><![CDATA[हेल्थ  टिप्स]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य दिवस]]></category>

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		<description><![CDATA[विश्व स्वास्थ्य दिवस सात अप्रैल को मनाया जाता है.  इसी दिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) की स्थापना हुई थी, इस वर्ष का अभियान शहरी जीवन&#8217;, मानव स्वास्थ्य को विशिष्ट रूप से दर्शाते हुए शहरों तथा                गांव को एक बेहतर रहने लायक जगह बनाने पर जोर देता है, कारण [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">विश्व स्वास्थ्य दिवस सात अप्रैल को मनाया जाता है.  इसी दिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) की स्थापना हुई थी, इस वर्ष का अभियान शहरी जीवन&#8217;, मानव स्वास्थ्य को विशिष्ट रूप से दर्शाते हुए शहरों तथा                गांव को एक बेहतर रहने लायक जगह बनाने पर जोर देता है, कारण अपने आसपास के वातावरण को साफ़ सुथरा रखते हुए स्वयं को स्वस्थ रखें.</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">अपनी वर्त्तमान जीवन शैली में उचित बदलाव लाकर हम अपनी दवाइयों का खर्चा कम कर सकते हैं. केवल उचित खान पान ही नहीं, वरन उचित विचार एवं उचित आचरण द्वारा ही हम  निरोग हो सकते हैं.</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">डायबिटीज़,उच्च रक्त चाप, एवं ह्रदय रोग जैसी बीमारियों के प्रमुख कारण हैं वसा युक्त एवं रेशा हीन आहार तथा शारीरिक श्रम का अभाव. पढ़े लिखे माता पिता भी अपने नन्हे मुन्नों को पिज्जा और बर्गर खिलाने तथा कोका कोला से कुल्ला कराने में अपनी शान समझते हैं. इस प्रकार उनका स्वाद फास्ट फ़ूड के लिए विकसित होकर, घर के पौष्टिक खाने को नकारने लगता है. अब तो गावों में भी कोलड्रिंक, चिप्स और डबलरोटी का खूब प्रचलन हो गया है. आधुनिकता की अंधी दौड़ में हम जान बूझ   कर रोगों के जाल में फंस जाते हैं.</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">&#8216;न्यू इंग्लैण्ड जर्नल ऑफ मेडिसिन&#8217; अध्ययन के अनुसार  नागरिकों में बढ़ती हुई सम्पन्नता के चलते, डायबिटीज़ एक महामारी के रूप में फैल रही है. भारत तथा अन्य एशियाई देशों में भी स्थिति खराब है. भारत में स्थूलता  के साथ-साथ कुपोषण के शिकार बच्चों की भी बहुतायत है. मोटापा हमें शारीरिक रूप से ही क्षतिग्रस्त नहीं करता, बल्कि मानसिक रूप से भी अस्वस्थ बनाता है.</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">बच्चे अपने खाली समय में तमाम इलेक्ट्रोनिक उपकरणों से चिपके रहते हैं. दौड़ने, खेलने कूदने जैसे क्रिया कलापों में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है जिसका सीधा असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है. खुली हवा में साँस लेते हुए  हम शारीरिक व्यायाम के लाभ उठाएं. स्कूल कॉलेजों में खेलकूद और योगाभ्यास को बढ़ावा दिया जाना चाहिए. युवक युवतियों में सायकिल चलाना एक आधुनिक फैशन के रूप में विकसित करना होगा.</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">प्राय: उच्च वर्ग के बालक बालिकाएं भी सड़क पर अपना कूडा  फेंकते हुए देखे जा सकते हैं. झुग्गी झोपड़ी में रहने वालों की बात तो जाने ही दीजिये.</div>
<div id="_mcePaste" style="position: absolute; left: -10000px; top: 0px; width: 1px; height: 1px; overflow-x: hidden; overflow-y: hidden;">सडकों पर, या कहीं पर भी, थूकना तो भारतीयों का जन्म सिद्ध अधिकार है. स्कूलों में पर्यावरण शिक्षा का  विषय तो अनिवार्य होना चाहिये है.</div>
<p><span style="color: #ff0000;">विश्व स्वास्थ्य दिवस सात अप्रैल को मनाया जाता है.  इसी दिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) की स्थापना हुई थी</span>, इस वर्ष का अभियान शहरी जीवन&#8217; के साथ साथ मानव स्वास्थ्य को विशिष्ट रूप से दर्शाते हुए शहरों तथा   गांव को एक बेहतर रहने लायक जगह बनाने पर जोर देता है, कारण अपने आसपास के वातावरण को साफ़ सुथरा रखते हुए स्वयं को स्वस्थ रखें.</p>
<p>अपनी वर्त्तमान जीवन शैली में उचित बदलाव लाकर हम अपने को निरोग रख सकते हैं.</p>
<p>डायबिटीज़,उच्च रक्त चाप, एवं ह्रदय रोग जैसी बीमारियों के प्रमुख कारण हैं वसा युक्त एवं रेशा हीन आहार तथा शारीरिक श्रम का अभाव. बच्चों का  स्वाद फास्ट फ़ूड के लिए विकसित होकर, घर के पौष्टिक खाने को नकारने लगता है. अब तो गावों में भी कोलड्रिंक, चिप्स और डबलरोटी का खूब प्रचलन हो गया है. आधुनिकता की अंधी दौड़ में हम जान बूझ   कर रोगों को खुद बुलाने लगे हैं.</p>
<p>&#8216;न्यू इंग्लैण्ड जर्नल ऑफ मेडिसिन&#8217; अध्ययन के अनुसार  नागरिकों में बढ़ती हुई सम्पन्नता के चलते, डायबिटीज़ एक महामारी के रूप में फैल रही है. भारत तथा अन्य एशियाई देशों में भी स्थिति काफी खराब है. भारत में मोटापे  के साथ-साथ कुपोषण के शिकार बच्चों की भी बहुतायत है. मोटापा हमें शारीरिक रूप से ही क्षतिग्रस्त नहीं करता, बल्कि मानसिक रूप से भी अस्वस्थ बनाता है.</p>
<p>बच्चे अपने खाली समय में तमाम इलेक्ट्रोनिक उपकरणों से चिपके रहते हैं. दौड़ने, खेलने कूदने जैसे क्रिया कलापों में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है जिसका सीधा असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है. खुली हवा में साँस लेते हुए  हम शारीरिक व्यायाम के लाभ उठाना चाहिये. स्कूल कॉलेजों में खेलकूद और योगाभ्यास को बढ़ावा दिया जाना चाहिए.  ज्यादातर लोग सड़क पर अपना कूडा  फेंकते हुए देखे जा सकते हैं. झुग्गी झोपड़ी में रहने वालों की बातअलग है.</p>
<p>स्कूलों में पर्यावरण शिक्षा का  विषय भी  अनिवार्य होना चाहिये है.</p>
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		<title>हृदय रोग से निजात पाने के लिये घरेलु उपाय</title>
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		<pubDate>Wed, 15 Feb 2012 11:17:41 +0000</pubDate>
		<dc:creator>hh_admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[बॉडी केयर / फिटनैस]]></category>
		<category><![CDATA[सिंपल घरेलू  उपाय]]></category>
		<category><![CDATA[हेल्थ  टिप्स]]></category>
		<category><![CDATA[हृदय रोग से निजात पाने के लिये घरेलु उपाय]]></category>

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		<description><![CDATA[
हृदय      रोग से पीड़ित व्यक्ति अकसर सोचते है कि उन्हें क्या खाना चाहिये क्या नहीं?
अच्छी सेहत के लिये      अपने भोजन में रेशेदार खाद्य पदार्थों का सेवन करें, बिना छाने गेहूं के आटे      की रोटी, आटे      [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>हृदय      रोग से पीड़ित व्यक्ति अकसर सोचते है कि उन्हें क्या खाना चाहिये क्या नहीं</strong><strong>?</strong></li>
<li>अच्छी सेहत के लिये      अपने भोजन में रेशेदार खाद्य पदार्थों का सेवन करें, बिना छाने गेहूं के आटे      की रोटी, आटे      की ब्रेड खायें।</li>
<li>शाकाहारी भोजन से आप      अपने स्वास्थ्य को ज्यादा अच्छा रख सकते हो।</li>
<li>वैजीटेबल सूप में जौ का      आटा मिला सकते हैं।</li>
<li>फलों के जूस का सेवन कम      करें। फलों का सेवन अधिक करें इससे फाइबर अधिक मिलता है।</li>
<li>खाने में थोड़े सूखे      मेवे का प्रयोग करें।</li>
<li>जिन सब्जियों या फलों      को छिलके सहित खा सकते हैं उन्हे अच्छी तरह धोकर खायें।</li>
<li>डिब्बा बंद खाद्यानों      का सेवन कम करें।</li>
<li>खाने में कभी-कभी शहद      का सेवन करें।</li>
<li>नाश्ते में मीठे अथवा      नमकीन दलिये का सेवन करें सेहत के लिये लाभप्रद होता है।</li>
<li>पेट को कचरे का डिब्बा      समझ कर मत खाईये।</li>
<li>भर पेट भोजन न करें      बल्कि एक रोटी कम खायें।</li>
<li>नाश्ते में हल्की चीजें      जैसे दूध, ब्रेड, अंण्डा, बिस्कुट खायें।</li>
<li>तली भुनी चीजें कम से      कम खायें।</li>
<li>भोजन में ज्यादा से ज्यादा      हरी सब्जी, सलाद, दाल, दही शामिल करें।</li>
<li>समय से खायें।</li>
<li>हमेशा शान्तिपूर्वक      धीरे-धीर खायें भोजन जल्दबाजी में न करें।</li>
<li>मीठा खाये किंतु अधिक      नहीं।</li>
<li>यदि पराठा खाना हो तो      नान स्टिक पर सेंक कर खायेंइससे घी तेल कम लगेगा।</li>
<li>आलू कम खायें अगर खायें      तो उबले आलू नमक काली मिर्च के साथ खायें।</li>
<li>चावल को माड निकालकर      खायें, चावल      घी या तेल में तलकर नहीं खाना चाहिये।</li>
<li>भोजन में अंकुरित दालें, अनाज, गाजर, फल अधिक उपयोग करें।      खाने में रेंशेदार पत्तेदार सब्जियों का इस्तेमाल करें। इससे पेट साफ रहेगा।</li>
<li>खाने  में नींबू जरूर लें, उससे विटामिन सी की कमी      पूरी होती है।</li>
<li>यदि आप होटल में खाना      खाने जा रहे हों तो पहले सूप, नींबू पानी या अन्य पथ का इस्तेमाल करें।</li>
<li>फास्ट फूड, पेस्ट्री, केक कम खायें।</li>
<li>सप्ताह में एक दिन      उपवास करें।</li>
<li>मलाई निकाला दूध ले      गाढ़ा दूध न पीऐं।</li>
</ul>
<p>हृदय रोग से पीड़ित व्यक्ति अकसर सोचते है कि उन्हें क्या खाना चाहिये क्या नहीं<strong>? </strong>ये सोचना बिलकुल उचित है क्योंकि खानपान का संबंध हृदय रोगों से है कुछ खाने के पदार्थ ऐसे है जिसके खाने से हृदय को ताकत मिलती है।</p>
<p>हईब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखने के लिये किडनी अहंम रोल निभाती है इस पर ध्यान दें ।</p>
<p>ब्डप्रेशर के मरीजोंको मौसंमी फल ,सब्जियां तथा संतुलित आहार लें। आंवले का रस तथा मुरब्बा लें यदि मधुमेह न हो तो।<strong>हल्का फुल्का व्यायाम भी अवश्य</strong><strong> </strong><strong>तथा नियमित करें</strong>।कारण व्यायाम इस बीमारी की आधी दवा खुद अपने में है।</p>
<ol>
<li>प्याज- एक कच्चे प्याज      का नित्य सेवन करने से हृदय की धड़कन सामान्य होती है।   प्याज का रस रक्त के      साथ मिलकर रक्त प्रवाह में सहायक होता है और हृदय को कई रोगों से बचाता है।</li>
<li>गाजर- गाढ़े रक्त को      पतला करने में व हृदय की धड़कन को सामान्य करने में गाजर बहुत सहायक होती है।</li>
<li>नींबू- हृदय की कमजोरी      दूर करने में नींबू अत्यंत लाभकारी है। इसके लगातार इस्तेमाल से रक्त      वाहिनियों में लचक आती है। नींबू के सेवन से हाईब्लड प्रेशर कम होता है। हृदय      शक्तिशाली बनता है।</li>
<li>अमरूद – अमरूद में विटामिन सी      होता है जो हृदय को बल व स्फूर्ति देता है।</li>
<li>हींग- हींग दुर्बल हृदय      को शक्ति देती है। रक्त के जमने को रोकती है रक्त संचार सरलता से होने के      लिये मदद करती है। पेट में वायु का दबाव भी कम होता है।</li>
<li>अदरक- ऐसा लगे मानो दिल      बैठा जा रहा हो, दिल      की धड़कन कम हो जाये तो सोंठ (सूखी अदरक) का काढ़ा बनाकर नमक डालकर प्रतिदिन      सेवन करें।</li>
<li>शहद- हृदय को शक्ति      देने के लिये शहद सर्वोत्तम औषधि है हार्टफेल होने से सुरक्षा भी करता है। जब      रक्त में ग्लाइकोजन के अभाव से रोगी के बेहोश होने का डर हो तो शहद खिलाकर      उसे बचाया जा सकता है। शहद मिनटों में रोगी के हृदय तक पहुंचकर शरीर में शक्ति      व उत्तेजना पैदा करता है। एक चम्मच शहद रोज खायें।</li>
</ol>
<p><strong><span style="text-decoration: underline;">हार्टफेल से ऐसे बचें</span></strong></p>
<p>दुर्बल हृदय के कारण हार्टफेल होने का खतरा रखने वाले मरीज अब अपनी टांगों को ज्यादा से ज्यादा हरकत में लाकर और डॉक्टर की निगरानी में टांगों का व्यायाम करके इस खतरे से काफी हद तक छुटकारा पा सकते हैं। एक शोध के अनुसार सांस का अटकना, अत्यधिक थकावट, पांव एवं पिडंलियों के इर्द गिर्द सोजिश हार्टफेल की तरफ बढ़ने की मुख्य निशानियां हैं। डॉक्टर की सलाह पर पिंडलियों की मालिश और व्यायाम करने से खतरे से बचने की काफी गुंजाइश रहती है। मगर जरूरी है कि कम से कम तीन माह तक लगातार  मालिश और व्यायाम किया जाए।</p>
<p><strong><span style="text-decoration: underline;">दिल का दौरा पड़ने पर क्या करें</span></strong><strong><span style="text-decoration: underline;">?</span></strong></p>
<p><span style="text-decoration: underline;">जब किसी को दिल का दौरा पड़ जाये तो प्रयास यही होना चाहिये कि उसे शीघ्र अस्पताल ले जाये। परंतु ऐसे समय पर यदि आप अकेले हो तो क्या करें</span><span style="text-decoration: underline;">?</span></p>
<p>दिल की धड़कन अनियमित होने और बेहोशी आने में केवल दस सेकेंड का अंतर होता है। ऐसे में मरीज को बार-बार जोर-जोर से खांसना चाहिये। हर बार खांसने के पश्चात गहरी सांस लेनी चाहिये। फिर जोर से खांसना चाहिये हर दो सेकेंड के बाद जोर-जोर से खांसना चाहिये तब तक खांसना चाहिये जब तक अस्पताल न पहुंच जायें इससे हृदय पर पड़ने वाले दबाव से खून का दौरा चलता रहता है। हृदय को सामान्य रखने में सहायक होता है। खांसते हुऐ गहरी सांसे लेते हुए डॉक्टर को फोन भी कर सकते हैं।</p>
<p>सबसे पहले एस्प्रिन या डिसप्रिन दवाई दें बिना पानी के जीभ के नीचे रख देंया रख लें।</p>
<p><strong>तनाव रहित रहना है तो नाश्ता कीजिये।</strong></p>
<p><strong>(</strong><strong>तनाव खुद अपने में एक बीमारी स्वरूप है इसे दूर रहकर तमाम बीमारी से आप खुद दूर रहेंगें)</strong></p>
<p>नवीनतम शोध के अनुसार प्रतिदिन नाश्ता न करने वाले व्यक्तियों की तुलना में नाश्ता लेने वाले कम तनाव पूर्ण रहते हैं। नाश्ता लेने वाले बच्चों का शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है। जो बच्चे नाश्ता नहीं लेते वो बच्चे पढ़ाई में मन नहीं लगा पाते, ना ही स्वस्थ रह पाते हैं। अगर आप शारीरिक, मानसिक रूप में स्वस्थ रहना चाहते हैं तो नाश्ता हर रोज कीजिये।(तनाव में बने रहने से नाश्ता न करने या समय पर न करने से बच्चे भी रक्तचाप की चपेट में आ सकते हैं)</p>
<p>मौसमी  फल- हृदय और( रक्त संस्थान) रक्त वाहिनियां तथा केपीलरीज को शक्तिशाली बनाने में मौसमी फल सर्वोत्तम है। इसके निरंतर प्रयोग से रक्त वाहिनियां कोमल व लचीली होती है। उनमें एकत्रित गंदा कोलोस्ट्रोल शरीर से बाहर निकालने में मौसमीफल सहायक होती है।</p>
<p>नींबू,खरबूजा,तरबूज गर्मियों में</p>
<p><strong>फूड जो बनाये मूड(रक्तचाप को रखे नियंत्रित)</strong></p>
<p>सुबह जो एनर्जी हम अपने अंदर महसूस करते हैं, वह शाम होने तक धीरे-धीर फुस्स होने लगती है। हम थकान महसूस करने लगते हैं। कारण हमारा भोजन (फूड) इसका असर हमारे मूड पर पड़ता है। हमारा भोजन कैसा हो, हमारा मूड कैसा है या हो इन सबके लिए हमें दिमाग का काम लेना पड़ता है। कारण यही दिमाग हमारे शरीर के हर सिस्टम को कंट्रोल करता है। जैसे हमारे भोजन के रासायनिक तत्वों को एक सिस्टम से दूसरे सिस्टम तक पहुंचाता है। जिसका असर हमारे दिल, शरीर, दिमाग पर पड़ता है और यही हमारे मूड को अच्छा या खराब बनाता है। अगर हम चाहते हैं कि हम हमेशा एलर्ट, चौकन्ने, फुर्तीले रहें, इसके लिए हमें अपने भोजन में प्रोटीन की मात्रा बढ़ानी होगी। कार्बोहाइड्रेट या लो फैट वाले भोज्य पदार्थ का सेवन करें। हमारे शरीर में कुछ रसायन जो शरीर को फुर्तीला बनाता है, वे दोपहर को तेजी से बनते हैं। इसलिए लंच में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर जरूर लें। अपने खाने में दोपहर को नीबू को अवश्य शामिल करें, इससे एलर्टनेस आती है।</p>
<p>हमारे शरीर का हर अंग आंख, हाथ, पैर सबका काम दिमाग से ही जुड़ा होता है। स्वस्थ रखने के लिए अपनी याद्दाश्त अच्छी बनाने के लिए, ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिये कार्बोहाइड्रेट पदार्थ लें, जैसे ब्राउन राइस, शकरकंद, बाजरा, ओट, वाइट ब्रेड, पास्ता, राइस कम से कम खायें। कार्बोहाइड्रेट पदार्थ देर से हजम होते हैं। इस वजह से देर तक हमें स्फूर्ति देते रहते हैं। संतरा, सेब, दही कार्बोहाइड्रेट के रिच स्रोत हैं। सनफ्लावर से बने फूड से हम अपने शरीर की डिमांड आधे से ज्यादा पूरी कर सकते हैं। केले में वसा बिल्कुल नहीं होता, आप इसे दोपहर को खा सकते हैं। ड्राईफ्रूट में अखरोट, पिस्ता, इससे विटामिन ई प्रचुर मात्रा में मिलता है। ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है। डार्क ब्राउन चॉकलेट खाने से उसमें होने वाले तत्व हमारे मूड को अच्छा बनाती है तथा हम अंदर से खुशी महसूस करते हैं। पानी भी कम महत्वपूर्ण नहीं है, हमारे शरीर के थकावट को दूर करने के लिए। मतलब यह कि अगर आपको भूख लगी है, कहीं से आ कर इसका मतलब ये नहीं कि आप को सिर्फ भूख ही लगी होती है। पानी भी हमारे शरीर की भूख का एक हिस्सा है। दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी अवश्य पियें।</p>
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		<title>जानें नैचुरल डिलिवरी के बारे में</title>
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		<pubDate>Tue, 14 Feb 2012 07:47:38 +0000</pubDate>
		<dc:creator>hh_admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[वुमन एंड चाइल्ड केयर]]></category>
		<category><![CDATA[जानें नैचुरल डिलिवरी]]></category>

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		<description><![CDATA[ नैचुरल डिलिवरी

नैचुरल डिलिवरीजानें नैचुरल डिलिवरी के बारे में&#8211;प्रसव एक ऐसी स्वाभाविक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से गर्भाशय में पूर्णत: पला शिशु स्वत: ही योनि मार्ग से बाहर आता है ।प्रसव से पूर्व वह गर्भाशय में ही फलता –फूलता रहता है जबकि प्रसवोपरांत पृथ्वी पर उसके जीवन की शुरूआत होती है।ऐसा देखागया है कि शिशु को गर्भाशय [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><strong><strong> </strong></strong><strong><strong>नैचुरल डिलिवरी</strong></strong></p>
<p><img class="size-full wp-image-2420 alignright" style="border-style: initial; border-color: initial;" title="cesarean_delivery-150x150" src="http://healandhealth.com/hi/wp-content/uploads/2012/02/cesarean_delivery-150x150.jpg" alt="cesarean_delivery-150x150" width="96" height="96" /></p>
<p style="text-align: center;"><strong><strong>नैचुरल डिलिवरी</strong>जानें नैचुरल डिलिवरी के बारे में&#8211;</strong>प्रसव एक ऐसी स्वाभाविक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से गर्भाशय में पूर्णत: पला शिशु स्वत: ही योनि मार्ग से बाहर आता है ।प्रसव से पूर्व वह गर्भाशय में ही फलता –फूलता रहता है जबकि प्रसवोपरांत पृथ्वी पर उसके जीवन की शुरूआत होती है।ऐसा देखागया है कि शिशु को गर्भाशय से बाहर निकालने का सम्पूर्ण उत्तरदायित्व गर्भाशय के उपर ही निर्भर रहता है।प्रसव के समय गर्भाशय  की पेशियां एक विशेष गति</p>
<p style="text-align: center;">से संकुचित और फैलने की क्रिया शुरू कर देती है।इस क्रम में संकुचित पेशियां शिशु पर पीछे से एक दबाव डालने लगती है तथा उसे बाहर निकलने के लिए विवश कर देती है।</p>
<p>यह कुदरत की सबसे रहस्यमय और अदभुत प्रक्रिया ही कही जा सकती है कि एक तरफ जहाँ  गर्भस्थ शिशु पूरे नौ महीने तक माँ के शरीर में ही छिपा रहता है वहीं अचानक एक दिन बाहर आने के लिए कड़ी मशक्कत करने लगता है।स्त्रियों में प्रसव की यह सम्पूर्ण प्रक्रिया तीन चरणों में जाकर संपन्न होती है।</p>
<p>प्रसव प्रक्रिया के <strong>सबसे पहले चरण</strong> में गर्भाशय़ के उपरी भाग की पेशियों में प्रत्येक पाँच मिनट  के अंतराल से पीड़ायुक्त संकुचन की लहरें सी उठने लग जाती है।इनके कारण गर्भाशय मुख की सभी नसों पर दबाव पडने लगता है और परिणामतय:गर्भाशय का मुख श्रोणी से बाहर आकर योनि में खुलने लगता है।गर्भाशय का मुख इस प्रथम चरण में तीन सेटी.मीटर के करीब खुल जाता है।इसके कुछ समय बाद गर्भाशय की पेशियों में संकुचन की लहरें प्रत्येक तीन मिनट के अंतराल से आने जाने लगती हैं और तब गर्भाशय का मुख छ:सें.मीटरके करीब खुल जाता है।इसके उपरांत धीरे धीरे गर्भाशय की संकुचन की गति और भी तीव्र होती जाती है तथा प्रत्येक दो-दो मिनट के अंतर से संकुचन की तरंगें आने जाने लगती है और तब गर्भाशय का मुख छ:सें.मीटर के करीब खुल जाता है।इसके उपरांत धीरे-धीरे गर्भाशय पर दबाव अत्याधिक बढ़ जाता है साथ ही इस अवस्था तक गर्भाशय का मुख भी पूरी तरह से खुल चुका होता है।इसी समय गर्भस्थ शिशु का सिर भी पहली बार गर्भाशय के मुख से बाहर झांकना शुरू कर देता है।</p>
<p><strong>द्वितीय चरण</strong></p>
<p>इस प्रथम चरण की संपूर्ण प्रक्रिया के कुछ समय बाद प्रसव प्रक्रिया के <strong>द्वितीय चरण</strong> की शुरूआत होती है।इस चरण में गर्भाशय का संकुचन कुछ भिन्न तरह से होने लगता है।इस चरण में शिशु बाहर की ओर आने की बजाए पीछे की ओर वापिस लौटने का दबाव बनाने लगता है।इसकी प्रतिक्रिया स्वरूप गर्भाशय में और भी तीव्रता के साथ संकुचन की क्रिया होने लग जाती है,जो शिशु पर पीछे से और भी तीव्र प्रति दबाव बनाने लगता है जिसके फलस्वरूप अंतत:शिशु गर्भाशय से पूरे का पूरा बाहर निकल आता है।इस तरह प्रसव की एक अति महत्वपूर्णप्रक्रिया संपन्न हो जाती है।शिशु को बाहर निकाल करने के बाद गर्भाशय भी अपनी पूर्व स्थिति में लौट आता है।</p>
<p><strong>तीसरा चरण</strong></p>
<p>शिशु के बाहर आने के पश्चात प्रसव प्रक्रिया <strong>का तीसरा चरण</strong> शुरू होता है।इस चरण में एक बार पुन: गर्भाशय की पेशियों में कुछ समय के अंतराल से संकुचन की तरंगें उठने लगती हैं। इस बार यह संकुचन गर्भाशय में रह गये आंवल को बाहर फेंकने के लिये शुरू होता है।इस चरण को पूर्ण होने में आधा,पौन से घंटे तक लग सकता है।आँवल के  गर्भाशय से बाहर निकलने पर ही तीसरा और अंतिम चरण संपन्न् हो पाता है।</p>
<p>यह तो हुई स्वाभाविक प्रक्रिया की बात,लेकिन अनेक बार प्रसव के दौरान ऐसी पेचीदगियाँ खड़ी हो जाती हैं जो प्रसूता की सामान्य प्रक्रिया में बाधा डालने लग जाती है।ऐसी परिस्थितियों में स्वाभाविक प्रसव प्रक्रिया से गर्भास्थ शिशु बाहर नहीं आ पाता है ऐसी दशा में प्रसव की प्रक्रिया के लंबे खिंचते जाने के कारण प्रत्येक पल शिशु और माँ दोनों के लिये जोखिम बढ़ता जाता है।इस स्थिति में शिशु को बाहर निकालने के लिये ऑपरेशन के द्वारा गर्भवती स्त्री के पेट को चीरा लगाकर शिशु को बाहर निकालना पड़ता है।ऑपरेशन द्वारा संपन्न की जाने वाली प्रसव प्रक्रिया को ही <strong>सिजेरियन डिलिवरी का</strong> नाम दिया जाता है।</p>
]]></content:encoded>
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		</item>
		<item>
		<title>डिसमेनोरिया क्या है? क्यों होता है</title>
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		<pubDate>Tue, 14 Feb 2012 07:31:01 +0000</pubDate>
		<dc:creator>hh_admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[वुमन एंड चाइल्ड केयर]]></category>
		<category><![CDATA[डिसमेनोरिया क्या है? क्यों होता है-]]></category>

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		<description><![CDATA[कुछ महिलाएं डिसमेनोरिया से ग्रस्त होती हैं। इनमें से कुछ डिसमेनोरिया ग्रस्त किसी अन्य कारण या बीमारी की वजह से भी हो सकती है।मेंसेस, किशोरावस्था से शुरू होता है।और 50-52 तक की उम्र यानि रजोनिवृत्ति  तक रहता है अधिकांश महिलाओं में ंेंम्सेस से कुछ दिन पहले ही पेच तथा पेडू में दर्द शुरू हो जाता [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कुछ महिलाएं</strong><strong> </strong><strong>डिसमेनोरिया से ग्रस्त होती हैं। इनमें से कुछ</strong><strong> </strong><strong>डिसमेनोरिया ग्रस्त किसी अन्य कारण या बीमारी की वजह</strong><strong> </strong><strong>से भी हो सकती है</strong>।मेंसेस, किशोरावस्था से शुरू होता है।और 50-52 तक की उम्र यानि रजोनिवृत्ति  तक रहता है अधिकांश महिलाओं में ंेंम्सेस से कुछ दिन पहले ही पेच तथा पेडू में दर्द शुरू हो जाता है जिससे उनकी दिनचर्या प्रभावित होती है।कईयों में मेंन्सेस के दौरारन काफी दर्द रोता है ।कभी कभी यह उम्र बढ़ने के साथ कम भी हो जाता है और बहुतों को गर्भावस्था के बाद बिल्कुल ठीक हो जाता है ।<strong> </strong>डिसमेनोरिया की शिकार ज्यादातर वे महिलाएं होती है ं जो कम एक्टिव होती है या फिर और भी कई कारण हो सकते हैं।</p>
<p><img class="alignright size-thumbnail wp-image-2416" title="images (4)" src="http://healandhealth.com/hi/wp-content/uploads/2012/02/images-41-150x150.jpg" alt="images (4)" width="120" height="120" /></p>
<p><strong>&#8212;डिसमेनोरियाडिसमेनोरिया</strong></p>
<p><strong> </strong><strong>मेंन्सस के दिनों में अधिक कष्टदायक स्थिति का होना</strong></p>
<ul>
<li>जिन युवतियों में      मेंन्सेस के दौरान दर्द होता है, परंतु प्रजनन अंगों में कोई रोग नहीं होता      उनमें</li>
<li>इस कष्टदायक स्थिति का      कारण और भी हो सकता है जैसे&#8212;</li>
<li>गर्भाशय से      प्रास्टाग्लैन्डिन  रसायन      अधिक मात्रा में बनने के कारण होता है,जो गर्भाशय को संकुचित करता है।इन महिलाओँ को      प्रजनन चक्र में अंडा निकलते समय हल्काक दर्द होता है परंतु जो स्त्रियां      व्यायाम नहीं करती है,आलसी      जीवन बिताती हैं उन्हें काफी तकलीफ से गुजरना पड़ता हैं और उन्हें दवा का      सहारा लेना पड़ता है।</li>
<li>दूसरे कुछ महिलाओं में<strong> </strong>डिसमेनोरिया      का कारण यह भी हो सकता है  गर्भाशय में रसोली,फाइब्रायड़ से ग्रस्त हैं।प्रजनन अंगो में      इंफेक्शन,अंडाशय      में सिस्ट,ट्यूमर      होने से भी।</li>
<li>पेडू ,कूल्हों ,जंघों में दर्द महसूस      होताहै प्राय यह परेशानी मेंन्सेस शुरू होने से एक दो दिन पहले से शुरू हो      जाता है।</li>
<li>मिचली,उल्टी,दस्त भी हो सकता है      ।कुछ को पूरे शरीर में दर्द होता है,कुछ का दर्द कम होता जाता है कुछ का बढ़ता      जाता है।इसे कन्वलसिवडिसमेनोरिया कहते हैं</li>
<li>जो महिलाएं कब्ज, पेट में गैस बनने की      समस्या से ग्रस्त होती हैं उनमें<strong> </strong>डिसमेनोरिया की ज्यादा      संभावना होती है।कुछ महिलाओं को मरोड के साथ दर्द होता है इसे स्पासमोडिक  डिसमेनोरिया कहते हैं।</li>
<li>कुछ महिलाओं मेंदर्द या      रक्तस्त्राव रूक रूक कर होता है कभी ज्यादा कभी कम हो जाता है।पेट के निचले      हिस्से से लेकर कमर तकदर्द  उठता है।जो जांघों तक फैलता है।गर्भाशय की      मांसपेशियां में तेजी से संकुचन होता है जिससे रक्त वाहिनियों पर दबाव पड़ता      है और रक्त प्रवाह कम हो जाता है।</li>
<li>गर्भाशय में रूकावट है, गर्भाशय ग्रीवा सकरी      होने से या फिर ।गर्भाशय के पीछे झुके होने से स्त्राव निकलनें में दिक्कत      होने के कारण ये समस्या हो सकती है।</li>
<li>कुछ महिलाएं कॉपर टी      लगवाती है इससे भी डिसमेनोरिया होने की संभावना  बढ़ जाती है।</li>
<li>कुछ महिलाएं स्वभाव से      डरी,सहमी,या तनावग्रस्त होती है      इससे भी है डिसमेनोरिया ग्रस्त हो जाती हैं।</li>
</ul>
<p><strong>यदि डिसमेनोरिया से ग्रस्त हैं</strong><strong> ,</strong><strong>तो  क्या करें  &#8212;</strong></p>
<ul>
<li>मेंसेस शुरू होने पर      किशोरियों या महिलाओं का मूड़ कुछ उदास व चिडचिडा सा हो जाता है इसका कारण है,शरीर ंें होने      वाले इस्ट्रोजन और प्रोटोस्टेऱॉन हारमोन्स के स्तर में उतार- चढाव के कारण      होता है.सो महिलाओं को उचित मात्रा में केल्शियम लेना चाहिये.एक दिन में कम      से कम 1200 मिली      ग्राम कैल्शियम की जरूरत होती है इस आवश्यकता को पूरी करने के लिये दूध तथा      दूध से बनी चीजों का सेवन करे जिससे हार्मोन के स्तर का उतार चढाव कम होता      है।इन दिनों किशोरियों को मुंहासे भी अधिक परेशान करते हैं यह ऐसा इस लिये      होता है कारण एंड्रोजन नामक हार्मोन के उत्पादन में वृध्दि की वजह से होता      हैयह त्वचा से ऑयल स्त्रवित करने का काम करता है और यह रोम छिद्रों को बंद कर      देता है जिसकी वजह से मुंहासे निकलते हैं।अपनी चेहरे की त्वचा को साफ करते      हैं लगातार यह काम मासिक शुरू होने के एक हफ्ते पहले से ही शूरू कर दें।</li>
<li>डिसमेनोरिया से जीवन      में हर महिला कभी न कभी ग्रस्त होती ही है परंतु इसके और भी करण हो सकते है      जिसका पता लगाने के लिये अवश्य डॉक्टरी परामर्श लें।</li>
<li>हर युवती को यौन शिक्षा      देना अनिवार्य है जिसमें प्रजनन चक्र,मेंन्सेस,गर्भाधारण,गर्भनिरोधक उपाय,यौन रोगों की जानकारी      आवश्यक है।</li>
<li>डिसमेनोरिया ग्रस्त      युवति ,महिला,को  हर माह      मेन्सेस शुरू होने से एक सप्ताह पहले से ही नमक कम खाना शुरू कर देना चाहिये।</li>
<li>पेट,पडू में दर्द होने से      गरम पानी से स्नान करें,तथा पेडू की सेकाई करें।</li>
<li>युवती को एक्टिव रहना      चाहिये।</li>
<li>पर्याप्त मात्रा में      संतुलित भोजन करें,हरी      साग सब्जियां,मौसमी      फल का उचित मात्रा में सेवन करें</li>
<li>तनाव ,चिंता से दूर      रहें।मेन्सस के संबं ध में गलत धारणा न पालें। नियमित मेन्सेस ही नारीत्व का प्रतीक      है।रेगुलर मेंसेस यानि आप पूर्णतय स्वस्थ हैं।</li>
<li>लेटते समय पैरों के      नीचे तकिया लगाकर सोयें</li>
<li>कमकिसी-किसी को मासिक धर्म के समय पेडू में दर्द एवं ऐठन होता है इसके और भी कई कारण हो सकते है। यदि अधिक तकलीफ होतो डॉक्टर की सलाह र ,पे़डू की हल्के हाथ से      मालिश करें</li>
<li>इ न दिनों अधिक ठंडी      चीजों का सेवन न करें</li>
<li>मेन्सस शुरू होने से दो      चार दिन पहले से आधा चम्मच हल्दी फांक कर   गुनगुना पानी पी लें रूका हुआ मेंन्सस भी साफ      हो जाता है अंदरूनी इंन्फेक्शन भी ठीक होगा हल्दी एंटीबायटिक होती है।</li>
<li>अंदरूनी अंगो की सफाई      बराबर रखें।डीटॉल से अंडरगर्मेंट साफ करें।वरना इंन्फेक्शन के चांसेस बढ़      सकते हैं</li>
</ul>
<p><strong>किसी-किसी को मासिक धर्म के समय पेडू में दर्द एवं ऐठन होता है इसके और भी कई कारण हो सकते है। यदि अधिक तकलीफ होतो डॉक्टर की सलाह लें। कई बार घरेलू उपाय से भी ठीक हो सकता है।</strong></p>
<p><strong><span style="text-decoration: underline;">उपाय</span></strong><strong><span style="text-decoration: underline;"> </span></strong>–</p>
<ul>
<li>गुड, अजवाइन का हलवा बनाकर      खाने से पेडू में होने वाला  दर्द एवं ऐठन तथा आने वाला मासिक धर्म ठीक      हो सकता है।</li>
<li>मासिक धर्म के समय में      होने वाली जांघों का दर्द हो, तो इन दिनों नीम के पत्ते 5 ग्राम अदरक का रस 10 ग्राम इसमें इतना ही      पानी मिलाकर इस काढे को जरूरत अनुसार दो चार बार पियें।</li>
<li>अगर मासिक धर्मबिल्कुल      न आता हो तो दो चम्मच गाजर का बीज(बजार में उपलब्ध होता है जहां सब्जियों के      बीज मिलते हैं)तथा गुड़ एक गिलास पानी में उबालकर रोज सुबह शाम पियें।<br />
- 50 ग्राम सोंठ, गुड 30 ग्राम, 5 ग्राम  कुटी जौ, वायविडंग,(जड़ी बूटी की दुकान पर      मिल जाता है) 1 गिलास      पानी में उबाले काढ़ा बनाऐं। आधा-आधा कप, तीन-तीन घंटे बाद पियें। रूका हुआ मासिक      स्त्राव शुरू हो जायेगा।</li>
<li>दो गिलास पानी में 4 चम्मच राई उबालकर पानी      छान लें उससे कपड़ा भिगाकर पेट सेकें। इससे मासिक स्त्राव खुलकर होगा व दर्द      भी कम होगा।</li>
<li>नारियल खाने से मासिक      धर्म खुलकर होता है।</li>
<li>तुलसी की जड़ को छाया      में सुखाकर पीसकर रख लें। इसे पावडर को चुटकी भर , पान में रखकर खाने से      अनावश्यक रक्त स्त्राव(अधिक मात्रा में होने वाला) बंद होता है।</li>
<li>लड़कियों को मासिक धर्म      के दिनों में सुबह भूखे पेट नींबू तथा नारंगी का रस पीने से पोटेशियम की कमी      पूरी होती है। पेडू में दर्द होने पर सेंक करें।</li>
<li>भोजन में मांसाहार कम      से कम करें।</li>
<li>इन दिनों में अधिक तेल      खटाई, मिर्च      मसाला न खायें। खाली पेट दूध न पियें पेट में ऐंठन होगी।</li>
<li>हल्दी की 2-3 गांठ सिल पर पीस लें। 1 गिलास गाय के दूध में      गुड़ तथा थोडी हल्दी पावडर  डालकर स्टील के बर्तन में 2-3 उबाल दें और ठंडा कर पी      जायें। मासिक धर्म खुलकर आयेगा। इसे एक माह तक पियें।</li>
</ul>
<p><strong>बीच मे बंद हुआ मासिक धर्म को फिर से चालू करने के लिये एक सरल प्रयोग</strong>&#8211;</p>
<ul>
<li>मूली ,गाजर तथा मेथी  के बीज ,इन तीनों को कूट पीस कर  छानकर रख लें, इस चूर्ण को चाय का एक      बडा चम्मच खाकर उपर से गरम पानी पिये  इस चूर्ण को तीन चार दिन तक लगातार सेवन करते      रहें रूका हुआ मासिक धर्म वापस शुरू हो जाता है</li>
<li>स्त्री रोग- मासिक धर्म, श्वेत प्रदर यदि मासिक      धर्म ठीक से नहीं आता तो एक ग्लास पानी में तुलसी बीज को उबाले, आधा रह जाए तो इस काढ़े      को पी जाएं, मासिक      धर्म खुलकर होगा।</li>
<li>मासिक धर्म के दौरान      यदि कमर में दर्द भी हो रहा हो तो एक चम्मच तुलसी का रस लें।</li>
<li>तुलसी का रस 10 ग्राम चावल के माड़ के      साथ पिए सात दिन। प्रदर रोग ठीक होगा। इस दौरान दूध भात ही खाएं।</li>
<li>तुलसी के बीज पानी में      रात को भिगो दें। सुबह मसलकर छानकर मिश्री में मिलाकर पी जाएं। प्रदर रोग ठीक      होगा।</li>
</ul>
<p>लें। कई बार घरेलू उपाय से भी ठीक हो सकता है।</p>
<p><strong><span style="text-decoration: underline;">उपाय</span></strong><strong><span style="text-decoration: underline;"> </span></strong>–</p>
<ul>
<li>गुड, अजवाइन का हलवा बनाकर      खाने से पेडू में होने वाला  दर्द एवं ऐठन तथा आने वाला मासिक धर्म ठीक      हो सकता है।</li>
<li>मासिक धर्म के समय में      होने वाली जांघों का दर्द हो, तो इन दिनों नीम के पत्ते 5 ग्राम अदरक का रस 10 ग्राम इसमें इतना ही      पानी मिलाकर इस काढे को जरूरत अनुसार दो चार बार पियें।</li>
<li>अगर मासिक धर्मबिल्कुल      न आता हो तो दो चम्मच गाजर का बीज(बजार में उपलब्ध होता है जहां सब्जियों के      बीज मिलते हैं)तथा गुड़ एक गिलास पानी में उबालकर रोज सुबह शाम पियें।<br />
- 50 ग्राम सोंठ, गुड 30 ग्राम, 5 ग्राम  कुटी जौ, वायविडंग,(जड़ी बूटी की दुकान पर      मिल जाता है) 1 गिलास      पानी में उबाले काढ़ा बनाऐं। आधा-आधा कप, तीन-तीन घंटे बाद पियें। रूका हुआ मासिक      स्त्राव शुरू हो जायेगा।</li>
<li>दो गिलास पानी में 4 चम्मच राई उबालकर पानी      छान लें उससे कपड़ा भिगाकर पेट सेकें। इससे मासिक स्त्राव खुलकर होगा व दर्द      भी कम होगा।</li>
<li>नारियल खाने से मासिक      धर्म खुलकर होता है।</li>
<li>तुलसी की जड़ को छाया      में सुखाकर पीसकर रख लें। इसे पावडर को चुटकी भर , पान में रखकर खाने से      अनावश्यक रक्त स्त्राव(अधिक मात्रा में होने वाला) बंद होता है।</li>
<li>लड़कियों को मासिक धर्म      के दिनों में सुबह भूखे पेट नींबू तथा नारंगी का रस पीने से पोटेशियम की कमी      पूरी होती है। पेडू में दर्द होने पर सेंक करें।</li>
<li>भोजन में मांसाहार कम      से कम करें।</li>
<li>इन दिनों में अधिक तेल      खटाई, मिर्च      मसाला न खायें। खाली पेट दूध न पियें पेट में ऐंठन होगी।</li>
<li>हल्दी की 2-3 गांठ सिल पर पीस लें। 1 गिलास गाय के दूध में      गुड़ तथा थोडी हल्दी पावडर  डालकर स्टील के बर्तन में 2-3 उबाल दें और ठंडा कर पी      जायें। मासिक धर्म खुलकर आयेगा। इसे एक माह तक पियें।</li>
</ul>
<p><strong>बीच मे बंद हुआ मासिक धर्म को फिर से चालू करने के लिये एक सरल प्रयोग</strong>&#8211;</p>
<ul>
<li>मूली ,गाजर तथा मेथी  के बीज ,इन तीनों को कूट पीस कर  छानकर रख लें, इस चूर्ण को चाय का एक      बडा चम्मच खाकर उपर से गरम पानी पिये  इस चूर्ण को तीन चार दिन तक लगातार सेवन करते      रहें रूका हुआ मासिक धर्म वापस शुरू हो जाता है</li>
<li>स्त्री रोग- मासिक धर्म, श्वेत प्रदर यदि मासिक      धर्म ठीक से नहीं आता तो एक ग्लास पानी में तुलसी बीज को उबाले, आधा रह जाए तो इस काढ़े      को पी जाएं, मासिक      धर्म खुलकर होगा।</li>
<li>मासिक धर्म के दौरान      यदि कमर में दर्द भी हो रहा हो तो एक चम्मच तुलसी का रस लें।</li>
<li>तुलसी का रस 10 ग्राम चावल के माड़ के      साथ पिए सात दिन। प्रदर रोग ठीक होगा। इस दौरान दूध भात ही खाएं।</li>
<li>तुलसी के बीज पानी में      रात को भिगो दें। सुबह मसलकर छानकर मिश्री में मिलाकर पी जाएं। प्रदर रोग ठीक      होगा।</li>
</ul>
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		<title>फीट (एडियां)क्या कहती हैं</title>
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		<pubDate>Wed, 08 Feb 2012 14:01:05 +0000</pubDate>
		<dc:creator>hh_admin</dc:creator>
				<category><![CDATA[वुमन एंड चाइल्ड केयर]]></category>
		<category><![CDATA[स्किन केयर]]></category>
		<category><![CDATA[हेल्थ  टिप्स]]></category>

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कहते हैं पैरों के रखरखाव को देखकर उस व्यक्ति के शारीरिक सफाई(स्वास्थ) का अंदाजा लगाया जा सकता हैचाहे स्त्रि  हो या पुरूष .एक व्यक्ति में उसके पेरों के स्वास्थ की अहम भूमिका है. हाथों की तुलना में पैरों की त्वचा अधिक मोटी होती है,जिसकी रोजाना देखभाल न करने से  यह समय के [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><strong><img class="alignright size-full wp-image-2409" title="images (3)" src="http://healandhealth.com/hi/wp-content/uploads/2012/02/images-31.jpg" alt="images (3)" width="135" height="135" />फीट (एडियां)क्या कहते हैं</strong></p>
<p>कहते हैं पैरों के रखरखाव को देखकर उस व्यक्ति के शारीरिक सफाई(स्वास्थ) का अंदाजा लगाया जा सकता हैचाहे स्त्रि  हो या पुरूष .एक व्यक्ति में उसके पेरों के स्वास्थ की अहम भूमिका है. हाथों की तुलना में पैरों की त्वचा अधिक मोटी होती है,जिसकी रोजाना देखभाल न करने से  यह समय के साथ गंदी हो जाती है.लोगों की एडियां फटने की समस्या सामने आती है,इसलिये पैरों की  डेड सेल्स को एक्सफॉलिएट  करने की जरूरत होती है.नियमित मॉश्चराइजिंग त्वचाको सूखे से बचाने के लिये महत्वपूर्ण है. पैरों की देखभाल चेहरे की देखभाल जैसी अहम है.हर बार स्नान. करते समय पैरों की साफ सफाई की आदत डालें. मौसम के अनुसार साफ्ट काटन सॉक्स पहने.पैरों को अक्सर गुनगुने पानी में कुछ देर रखकर नरम तौलिये से पोंछे फिर कोई क्रीम लगायें.पडिकेयर करने के अलावा रोजाना केयर करने से लंबे समय तक पैरों को मुलायम रख सकते हैं.यदि पैर अधिक सूखे हों तो रात को सोते समय मॉइश्चराइजर या पेट्रोलियम जैली  लगाएं.पैरों में फंगल इंफेक्शन होने का डर अधिक होता है इसलिये नियमित सफाई का ध्यान अवश्या रखें.यदि एडियों में दर्द हो तो हील वाले जूते चप्पल पहनने से बचें,वरना दर्द बढ़ जायगा.</p>
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