Posts for the ‘हर्बस / स्पाइसेस’ Category
9 articles posted under this category

दालचीनी की कहानी (आयुर्वेद की जुबानी)

Monday, August 30th, 2010
दालचीनी (Cinnamomum velum) हिन्दी में - दालचीनी। दालचीनी दो प्रकार की होती है। मोटी तथा पतली दालचीनी यह लघु, उष्ण, तीखी, मधुर, कटी, रुक्ष और पित्तकारक होती है। यह बलगम, गैस, खुजली, अपक्व रस और अरुचिनाशक एवं दिल के रोग, मूत्राशय के रोग, बवासीर, पेट के कीड़े मिटाने वाली तथा वीर्य बढ़ाने वाली होती है। दालचीनी के पेड मालाबार आदि प्रदेशों में होते है। पत्तों को सुंघाने से लौंग जैसी खुशबू आती है। इसका फूल गुलाब के फूल के समान महकता है। इसके फल करौंदे के जैसे होते है। इनमे से तेल निकलता है। इसके फूलों का इत्र (परफ्यूम) भी बनाया जाता है। दालचीनी की तासीर गर्मे होती है। दालचीनी का अधिक मात्रा में सेवन  हानिकारक होता है। उत्तम दालचीनी की गुणवत्ता की पहचान  ... »

लाल हो या हरी मिर्च के औषधीय गुण

Monday, July 26th, 2010
मिर्च भारतीय मसालों की जान है ये तो सभी लोग जानते हैं ।खाने में कितनी उपयोगी है येभी जानते हैं ।मिर्च के किस्म हरी, लाल,तथा काली। सभी  मिर्च के अपने-अपने उपयोग तथा गुण अलग -अलग है तासीर भी । हम यहां पर आपको हरी तथा लाल मिर्च के औषधीय गुणों के  बारे में बताना चाहते हैं।शिमला मर्च तीखी नहीं होती पर विटामिन सी से भरपूर होती है। जो बड़ी जात की मिर्च होती है। लाल मिर्च 1. आंख दुखना या लाल होना। लाल मिर्च(साबुत को पीसकर) लुगदी बना लें जिस ओर की आंख लाल हो या दर्द हो उसी पैर के अंगूठे पर व लुगदीका लेप करें, यदि दोनों आंख में हो रही हों तो दोनों में करें- 2 घंटे में आंख ठीक ... »

तुलसी

Tuesday, June 22nd, 2010
तुलसी का महत्व तुलसी को संजीवनी बूटी भी कहा जाता है। भारतीय संस्कृति में यह पूज्य है। तुलसी दो तरह की होती है। काली तुलसी व कपूर तुलसी (बेल तुलसी)तुलसी की उपयोगिता को देखते हुए आज इसकी खेती भी होने लगी है आजमगढ मे बडे पैमाने पर  तुलसी की खेती शुरू हो गई है जो देश विदेश मे भेजी जा रही है । तुलसी की उपयोगिता
  • तुलसी भोजन को शुद्ध करती है, इसी कारण ग्रहण लगने के पहले भोजन में डाल देते हैं जिससे सूर्य या चंद्र की विकृत किरणों का प्रभाव भोजन पर नहीं पड़ता।
  • मृत व्यक्ति के मुंह में डाला जाता है, धार्मिक पद्धति के अनुसार उस व्यक्ति को ... »

एलोवेरा क्या है

Thursday, June 17th, 2010
एलोवेरा 5,000 वर्ष पुरानी रामबाण औषधि है। इसका वनस्पति नाम धृतकुमारी ,ग्वारपाठा है। इसे  संजीवनी पौधा भी कहा जाता है। इसकी लगभग 250 उपजातियां हैं जिनमें से कुछ गिनी चुनी ही औषधीय गुणों से परिपूर्ण होती है। उन कुछ प्रजाततियों में से एक है जो सबसे ज्यादा प्रभावशाली है वह है बार्बाडेन्सीस मीलर। हमारे शरीर को 21अमीनोएसिड़ की जरूरत होतीहै जिनमेंसे 18अमीनोएसिड़ केवल एलोवेरा से ही मिलते है। एलोवेरा जैल में वो औषधीय तत्व हैं जो खुद से शरीर में नहीं बनते बल्कि एलोवेरा से ही प्राप्त होते हैं जैसे– कुछ अनिवार्य खनिज, 8अनिवार्य अमीनोएसिड,जो शरीर में खुद से नहीं बनते न  ही शरीर में जमा होते हैं इस कारण इन तत्वों को निरंतर शरीर को जरूरत रहती है जिसे पूरी करना भी ... »


Redwing Solutions