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Posts for the ‘वुमन एंड चाइल्ड केयर’ Category
21 articles posted under this category
बच्चों को दिन भर बनाए रखती है चैतन्य “कॉफी”
Monday, April 22nd, 2013
बच्चों को दिन भर बनाए रखती है चैतन्य
“कॉफी”
वैसे तो कॉफी को वयस्कों का ड्रिंक माना जाता है किंतु वैज्ञानिकों का मानना है कि कॉफी बच्चों के लिए भी फायदे मंद है.ये बच्चों को नशीली चीजों से दूर रखती है.गहन अध्ययन के बाद इटली के ह्यूमेनीटास गावाजेनी इंस्टीच्यूट की डॉ.चिआरा के अनुसार कॉफी बच्चों को कई बीमारियों से बचाती है इसमें मौजूद टेनिन और एंटीऑक्सीडैंट ह्रदय एंव धमनियों के लिए फायदेमंद होते हैं,जिससे बच्चों को सर दर्द,लीवर प्रोबलम ,सायरोसिस और गॉलस्टोन जैसे रोग होने की संभावना कम हो जाती है .डॉ.पाबलो डुबोसिस का कहना है कि कॉफी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बच्चों को भविष्य में नशे की लत लगने से बचाती है.कॉफी मस्तिष्क के उन ... »
जानें नैचुरल डिलिवरी के बारे में
Tuesday, February 14th, 2012
नैचुरल डिलिवरी
नैचुरल डिलिवरीजानें नैचुरल डिलिवरी के बारे में--प्रसव एक ऐसी स्वाभाविक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से गर्भाशय में पूर्णत: पला शिशु स्वत: ही योनि मार्ग से बाहर आता है ।प्रसव से पूर्व वह गर्भाशय में ही फलता –फूलता रहता है जबकि प्रसवोपरांत पृथ्वी पर उसके जीवन की शुरूआत होती है।ऐसा देखागया है कि शिशु को गर्भाशय से बाहर निकालने का सम्पूर्ण उत्तरदायित्व गर्भाशय के उपर ही निर्भर रहता है।प्रसव के समय गर्भाशय की पेशियां एक विशेष गति
से संकुचित और फैलने की क्रिया शुरू कर देती है।इस क्रम में संकुचित पेशियां शिशु पर पीछे से एक दबाव डालने लगती है तथा उसे बाहर निकलने के लिए विवश कर देती है।
यह कुदरत की सबसे रहस्यमय और अदभुत प्रक्रिया ही कही जा सकती है कि ... »डिसमेनोरिया क्या है? क्यों होता है
Tuesday, February 14th, 2012
कुछ महिलाएं डिसमेनोरिया से ग्रस्त होती हैं। इनमें से कुछ डिसमेनोरिया ग्रस्त किसी अन्य कारण या बीमारी की वजह से भी हो सकती है।मेंसेस, किशोरावस्था से शुरू होता है।और 50-52 तक की उम्र यानि रजोनिवृत्ति तक रहता है अधिकांश महिलाओं में ंेंम्सेस से कुछ दिन पहले ही पेच तथा पेडू में दर्द शुरू हो जाता है जिससे उनकी दिनचर्या प्रभावित होती है।कईयों में मेंन्सेस के दौरारन काफी दर्द रोता है ।कभी कभी यह उम्र बढ़ने के साथ कम भी हो जाता है और बहुतों को गर्भावस्था के बाद बिल्कुल ठीक हो जाता है । डिसमेनोरिया की शिकार ज्यादातर वे महिलाएं होती है ं जो कम एक्टिव होती है या फिर और भी कई कारण हो सकते हैं।
---डिसमेनोरियाडिसमेनोरिया
मेंन्सस के दिनों में अधिक कष्टदायक स्थिति का ... »
फी्ट्स (एडियां)क्या कहती हैं
Wednesday, February 8th, 2012
फीट (एडियां)क्या कहते हैं
कहते हैं पैरों के रखरखाव को देखकर उस व्यक्ति के शारीरिक सफाई(स्वास्थ) का अंदाजा लगाया जा सकता हैचाहे स्त्रि हो या पुरूष .एक व्यक्ति में उसके पेरों के स्वास्थ की अहम भूमिका है. हाथों की तुलना में पैरों की त्वचा अधिक मोटी होती है,जिसकी रोजाना देखभाल न करने से यह समय के साथ गंदी हो जाती है.लोगों की एडियां फटने की समस्या सामने आती है,इसलिये पैरों की डेड सेल्स को एक्सफॉलिएट करने की जरूरत होती है.नियमित मॉश्चराइजिंग त्वचाको सूखे से बचाने के लिये महत्वपूर्ण है. पैरों की देखभाल चेहरे की देखभाल जैसी अहम है.हर बार स्नान. करते समय पैरों की साफ सफाई की आदत डालें. मौसम के अनुसार साफ्ट काटन सॉक्स पहने.पैरों को अक्सर गुनगुने पानी में कुछ देर रखकर नरम तौलिये ... »
जानें नैचुरल डिलिवरी के बारे में
Sunday, February 27th, 2011
जानें नैचुरल डिलिवरी के बारे में--
प्रसव एक ऐसी स्वाभाविक प्रक्रिया है जिसके
माध्यम से गर्भाशय में पूर्णत:
पला शिशु स्वत: ही योनि मार्ग से बाहर आता है ।प्रसव से पूर्व वह गर्भाशय में ही फलता –फूलता रहता है जबकि प्रसवोपरांत पृथ्वी पर उसके जीवन की शुरूआत होती है।ऐसा देखागया है कि शिशु को गर्भाशय से बाहर निकालने का सम्पूर्ण उत्तरदायित्व गर्भाशय के उपर ही निर्भर रहता है।प्रसव के समय गर्भाशय की पेशियां एक विशेष गति से संकुचित और फैलने की क्रिया शुरू कर देती है।इस क्रम में संकुचित पेशियां शिशु पर पीछे से एक दबाव डालने लगती है तथा उसे बाहर निकलने के लिए विवश कर देती है।
यह कुदरत की सबसे रहस्यमय और अदभुत प्रक्रिया ही कही जा सकती है कि एक तरफ जहाँ गर्भस्थ शिशु पूरे ... »




