संस्कारों का सीधा असर सेहत पर

Wednesday, May 19th, 2010

गर्भावस्था में ही  संस्कारों की नींव पड़ती है।अच्छे संस्कारों का  असर अच्छा तथा खराब संस्कारों  का खराब असर, सीधा हमारी सेहत पर पड़ता है। बच्चे के पैदा होने के बाद जो अच्छी बुरी बातें सीखते हैं उसे आदत में लिया जा सकता है।

ध्यान रहे, संस्कारों का सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ता है। इस की नींव गर्भ के दौरान ही पड़ती है-जिसे हम कहते हैं संस्कार हमारे खून में है।इसे हम अपने पूर्वजों से पाते है चाहे वह माता पिता हों या दादा,दादी हो या नाना,नानी या फिर घर का कोई भी व्यक्ति जो गर्भवती महिला के आसपास होते हैं।इनमें से जो भी ज्यादा संस्कारी होता है हम चाहते हैं कि आने वाला बेबी भी वैसा ही हो।

अब शुरू करते हैं संस्कार का अर्थ क्या है? वह है मन,वाणी,तथा शरीर का सुधार।

हमारे हिंदुओं में विवाह के समय सबसे अधिक जोर वर वधु तथा उनके परिवार के संस्कारों पर ही दिया जाता है।

यही संस्कारों की शुरूआत गर्भावस्था में ही शुरू हो जाती है।आज कल लोग प्लानिंग करते हैं,अच्छा है इससे एक फायदा तो अवश्य है कि पति पत्नि  माँ – बाप बनने से पहले खुद को तन,मन,तथा धन से सुव्यवस्थित हो जायें तथा एक दूसरे के प्रति समर्पित हों  हैं या इसके लिये अपने को तैयार कर लेते हैं जो बहुत जरूरी है। इसका प्रभाव आने वाली संतान पर पड़ता ही है।प्रेगनेंट वुमन के आसपास रहने वाले लोगों की आदतों तथा उनकी क्रियाकलाप को देखते सुनते उसका  पूरा असर होने वाली संतान पर पडता है जो हम कहते हैं कि यह बिल्कुल अपने चाचा पर गया है।

इन्हीं  संस्कारों को ध्यान में रखकर हमारे बुजुर्गों ने प्रेगनेंसी के पाँचवे,छटे,या सातवें माह में गोदभराई की रस्म बनाई थी कारण इन्हीं महीनों में गर्भस्थ शिशु का मानसिक विकास होता है इस रस्म को करने के लिये घर के सभी बड़े बुजुर्गों से लेकर सारे शुभचिंतक होते हैं, जो होने वाली माँ तथा आने वाले बच्चे को ढेर सारा प्यार तथा आशीर्वाद देते हैं। आने वाली महिलाएं, होने वाली माँ के कान में बच्चे को लेकर अच्छी-अच्छी बातें बोलते हैं।ईश्वर से अच्छी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।सुसंस्कृत माहौल बनाने की कोशिश की जाती है जैसे पूजा पाठ इत्यादि किया जाता है ताकि इसका असर होने वाली माँ और आने वाले बच्चे पर अच्छा पड़े। यदि आने वाला बच्चा अच्छे संस्कारों को लेकर नहीं आता बच्चा बड़ा होकर आवारा या अन्य किसी तरह का कुकर्म करे तो इसका  खराब असर घर के सदस्यों के स्वास्थ्य पर पूरा पूरा पड़ता है।कभी –कभी तो ऐसे बच्चों की हरकतों से मां बाप या अन्य बडे बूढे चिंता में पड़कर किसी बड़ी बीमारी के शिकार हो जाते हैं जैसे उच्चरक्तचाप या इससे दुखी होकर हार्ट अटैक भी हो जाता है। और यहीं पर यदि अच्छे संस्कारों को लेकर आता है तो वह  अपने घर,परिवार,समाज और फिर देश की भलाई के बारे में सोच सकता है।कारणऐसेलोगों से ही तरक्की  करता है।इसी कारण हमारा इंडिया एक सुसंस्कृत देश कहलाता है।यहाँ  सुसंस्कृति पर अधिक महत्व दिया जाता है।

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