लहसुन के बड़े बड़े गुण

Saturday, March 20th, 2010

लहसुन का वैज्ञानिक नाम एलियम सैटीवुमएल है। लहसुन में एलियम नामक एंटीबायोटिक होता है जो बहुत से रोगों के बचाव में लाभप्रद है। लहसुन में एलिसिन नामक पदार्थ पाया जाता हैये उन कीटाणुओं को मारता है जो पेनीसिलीन से भी नष्ट नहीं होते।

लहसुन में कैंसर से लड़ने की क्षमता  होती है।खाने-पीने तथा प्रदूषण से शरीर मेंबनने वाले नाइट्रोसेमाइन के असर के कम करता है क्योंकि यह एंटीऑक्सिडेंट होता है।
लहसुन में बड़े-बड़े गुण होते हैं। आधुनिक चिकित्सा विज्ञानियों को भी प्रभावित कर चुका है। लहसुन में कार्बोहाइड्रेट्स , प्रोटीन होता है। इसके अतिरिक्त इसमें वसा, खनिज लवण, फास्फोरस, आयरन, विटामिन ए,बी तथा सी होतेहैं।
लहसुन छोटी-मोटी बीमारियों के अलावा कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के उपचार में भी कारगर साबित होने की बात विशेषज्ञ करते हैं। लहसुन में हृदय संबंधी परेशानियों और फ्लू आदि से बचने के गुण भरे हैं। यही नहीं, यह अन्य गंभीर बीमारियों के उपचार में भी मददगार साबित होता है।
पके हुए भोजन में मिश्रित लहसुन की अपेक्षा कच्चा लहसुन अधिक फायदेमंद होता है। इसकी दो कच्ची कलियों को बेहतर तरीके से चबा चबाकर खाया जाए, तो फायदा होता है। इस दौरान ऑक्सीजन इसके गुणों को और अधिक बढ़ा देती है। ।
हर प्रकार के हृदय रोग में लहसुन की दो-चार कलियां छीलकर दूध में पकाकर खिलाने से आराम मिलता है। यदि रोगी कच्चे लहसुन की कलियां खा सके तो पानी के साथ इसका सेवन करना चाहिए। इस प्रयोग से रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रित होता है। इसमें बहुत समय लगता है। इसलिए धैर्य की आवश्यकता होती है।
अब तो डायबिटीज के उपचार के लिए भी इसके गुण सामने आए हैं। रक्त में यह शर्करा के स्तर को नियमित करने में मददगार होता है। फेफड़ों में क्षय रोग होने पर लहसुन के रस को रूई पर छिड़क कर रूई को नासाद्वारों पर बांध दें। लहसुन की गंध तथा गुणों को लेकर जो सांस फेफड़ों में जाएगी इससे क्षय दूर होगा। सभी प्रकार की
खांसी के इलाज के लिए लहसुन अचूक औषधि है।
कुक्कर खांसी के इलाज के लिए विशेषकर लगभग 25 बूंदें लहसुन का रस अनार के शर्बत में मिलाकर पिएं। इससे शीघ्र लाभ होता है। गला बैठा हो या स्वर में खरखराहट हो तो गर्म पानी में लहसुन का रस घोलकर प्रतिदिन लगभग पांच मिनट गरारा करें। लहसुन भारतीय रसोई में प्रयोग किया जाने वाला एक प्रमुख मसाला है।
लहसुन चेहरे की रंगत को भी निखारता है।
इन पर ध्यान दें–
.अगर आप को हाथ पैर में सुन्नता या अधिक कमजोरी महसूस होती है।
. आंखों से दिखाई देने में कुछ परेशानी महसूस कर रहें हों।
. आलस्य या सुस्ती अधिक महसूस कर रहें हों।
. चलने फिरने में परेशानी महसूस कर रहें हों।
. सर दर्द अचानक हो तेज
. बोलने या कुछ भी समझने में दिक्कत या कमी महसूस कर रहें हों।
इन सारी चीजों में से कुछ भी आपको लगे तो तुरंत डॉक्टर की सहायता लें ये पक्षाघात(लकवा) के संकेत के लक्षण भी हो सकते हैं। इनमें से कुछ भी महसूस करें तो मरीज को अपना धीरज व हिम्मत नहीं खोना चाहिये। ऐसी स्थिति में मरीज के घर वालों का फर्ज बनता हा कि पक्षाघात के आक्रमण के पुरंत बाद ही उन्हें डॉक्टर के
पास ले जाया जाये। इसके बाद आयुर्वेद में भी इस रोग से ठीक होने के कई कारगर नुस्खे हैं।
लहसुन से चिकित्सा पक्षाघात(लकवा) की–
अगर आपको लहसुन की गंध पसंद नहीं है कारण मुंह से बदबू आती है। मगर लहसुन खाना भी जरूरी है तो रोजमर्रा के लिये  आप लहसुन को छीलकर या पीसकर दही में मिलाकर खाये तो आपके मुंह से बदबू नहीं आयेगी।
-लहसुन खाने के बाद इसकी बदबू से बचना है तो जरा सा गुड़ और सूखा धनिया मिलाकर मुंह में डालकर चूसें कुछ देर तक, बदबू बिल्कुल निकल जायेगी। परंतु अपने स्वास्थ को ध्यान में रखते हुऐ लहसुन जरूर खायें।
लहसुन से चिकित्सा पक्षाघात(लकवा) की-
- औषधि नं-1
औषधि के लिये लहसुन बड़ी गांठ वाला जिसमें से अधिक रस निकाल सकें ले।
विधि- लहसुन की आठ कली लेकर छील लें फिर इसे बारीक चटनी की तरह पीस लें फिर गाय का दूध लेकर उबाल लें, अब थोड़ा सा दूध अलग कर लें उसमें शक्कर मिला दें, जब यह दूध हल्का गरम रह जाय तो इस दूध में लहसुन मिलाकर पी जायें, ऊपर से इच्छा अनुसार जितना चाहें दूध पियें। परंतु ध्यान रखें लहसुन कभी
खौलते दूध में न मिलावें वरना उसके गुण नष्ट हो जायेंगे। दिन में दो बार ये विधि करें। इस प्रकार दिन में दो बार इसका सेवन करें। तीन दिन तक दोनों समय लेने के बाद इसकी मात्रा बढ़ाकर 9 या 10 कलियां कर दें। एक हफ्ते बाद कम से कम 20 कली लहसुन लें। इसी तरह तीन बाद फिर बढ़ाकर 40 कली का रस दूध से
लें। इसके बाद अब इनकी मात्रा घटाने का समय है जैसे-जैसे बढ़ाया वैसे-वैसे ही घटाते जाना है तीन-तीन दिन पर यानी-
1 पहली बार – 8 कली लहसुन की लें लेत रहें
2 बार तीन दिन बाद-10 कली लहसुन की लें लेते रहें
3 बार 1 सप्ताह बाद – 20 कली लहसुन की लें लेते रहें
4 बार 1 सप्ताह बाद- 40 कली लहसुन की लें लेते रहें
इसका सेवन करने से और भी लाभ है पेशाब खुलकर होगा।
दस्त साफ होने लगेगी शरीर की चेतना शक्ति बढ़ने लगेगी तथा पक्षाघात का असर धीरे-धीरे कम होने लगेगा। अगर उच्चरक्त चाप है तो यह प्रयोग काफी कारगर सिद्ध हो सकता है।
-औषधि नं-2
मोटी पोथी वाला 1 मोटा दाना लहसुन का लेकर छीलकर पीस लें बारीक और इसे चाट लें ऊपर से गाय का दूध हल्का गर्म चीनी डालकर पी जायें। अब दूसरे दिन 2 लहसुन की चटनी चाट कर दूध पी जायें। तीसरे दिन तीन लहसुन, चौथे दिन चार कली इसी तरह  से ग्यारह दिन तक 11 लहसुन पीसकर चाटें व दूध पी जायें। अब
बारहवें दिन से 1-1 कली लहसुन की घटाती जायें तथा सेवन की विधि वहीं होगी। एक लहसुन की संख्या आ जाने पर बंद कर दें पीना। इससे हाई ब्लड प्रेशर का असर कम होगा। पक्षाघात का प्रभाव कम होगा। सर का भारी पन ठीक होगा। नींद अच्छी आयेगी। दस्त खुलकर होगा। भूख अच्छी लगेगी। (अगर आप सामान्य तरीके से
रोज लहसुन खायें तो इसका खतरा ही नहीं होगा।)
नं-3 लहसुन व शतावर- 7-8 कली लहसुन, शतावर का चूर्ण 1 तोला दोनों को खरल में डालकर घोंट लें, आधा किलो दूध में शक्कर मिलाकर लहसुन शतावर पिसा हुआ मिलाकर पी जायें इसे लेने पर हल्का सुपाच्य भोजन लें। शरीर के हर अंग का भारी पन ठीक होगा साथ पक्षाघात में फायदा होगा। इसे 31 दिन लगातार
लें।
नं-4 लहसुन,शतावर चूर्ण, असगंध चूर्ण- 1 चाय का बड़ा चशतावर चूर्ण, उतनी ही मात्रा में असगंध चूर्ण दोनों चूर्ण को दूध में मिलाकर पियें साथ दोपहर के भोजन के साथ लहसुन लें। लहसुन की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाते जायें, रोटी, आंवला, लहसुन का प्रयोग भोजन में अवश्य करें। शरीर की मालिश भी करें इन सभी
विधियों से पक्षाघात में जल्दी व सरलता से मरीज ठीक होता है।
नं-5 लहसुन छीलकर पीस लें 3-4 कली, फिर उसमें उतनी ही मात्रा में शहद मिला कर चाटें। धीरे-धीरे लहसुन की मात्रा बढ़ाते जायें 1-1 कली करके कम से कम 11-11 कली तक पहुंचे साथ बराबर मात्रा में शहद भी मिलाकर चाटें। साथ लहसुन का रस किसी तेल में मिलाकर उस प्रभावित हिस्से पर लेप, मालिश
हल्के हाथ से करें। लहसुन के रस को थोड़ा गरम करके लगायें धीरे-धीरे काफी फायदा पहुंचेगा(लहसुन से रक्त संचार ठीक तरह से होता है।)
नं-6 दो पोथी पूरी मोटे दाने वाले पीसकर रस निकाल लें अब इसे चार तोला तिल के तेल या सरसों के तेल में मिलाकर पकायें, जब सिर्फ तेल रह जाये तो छानकर इस तेल से सुबह, शाम मालिश करें लकवा, वात रोग मिट जायेगा।(अगर आप तिल का तेल इस्तेमाल करें ज्यादा अच्छा होगा।)
नं-7 पक्षाघात के रोगी को आप लहसुन की चटनी को मख्खन के समभाग के साथ भी दे सकते हैं(लहसुन मख्खन बराबर मात्रा) में। यह सुरक्षित योग है इसे प्रातः सांय दोनों समय प्रयोग कर सकते है

लहसुन में कैंसर से लड़ने की क्षमता  होती है।खाने-पीने तथा प्रदूषण से शरीर मेंबनने वाले नाइट्रोसेमाइन के असर के कम करता है क्योंकि यह एंटीऑक्सिडेंट होता है। लहसुन छोटी-मोटी बीमारियों के अलावा कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के उपचार में भी कारगर साबित होने की बात विशेषज्ञ करते हैं। लहसुन में हृदय संबंधी परेशानियों और फ्लू आदि से बचने के गुण भरे हैं। यही नहीं, यह अन्य गंभीर बीमारियों के उपचार में भी मददगार साबित होता है।

लहसुन में बड़े-बड़े गुण होते हैं। आधुनिक चिकित्सा विज्ञानियों को भी प्रभावित कर चुका है। लहसुन में कार्बोहाइड्रेट्स , प्रोटीन होता है। इसके अतिरिक्त इसमें वसा, खनिज लवण, फास्फोरस, आयरन, विटामिन ए,बी तथा सी होतेहैं। पके हुए भोजन में मिश्रित लहसुन की अपेक्षा कच्चा लहसुन अधिक फायदेमंद होता है। इसकी दो कच्ची कलियों को बेहतर तरीके से चबा चबाकर खाया जाए, तो फायदा होता है। इस दौरान ऑक्सीजन इसके गुणों को और अधिक बढ़ा देती है। ।

हर प्रकार के हृदय रोग में लहसुन की दो-चार कलियां छीलकर दूध में पकाकर खिलाने से आराम मिलता है। यदि रोगी कच्चे लहसुन की कलियां खा सके तो पानी के साथ इसका सेवन करना चाहिए। इस प्रयोग से रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रित होता है। इसमें बहुत समय लगता है। इसलिए धैर्य की आवश्यकता होती है।

अब तो डायबिटीज के उपचार के लिए भी इसके गुण सामने आए हैं। रक्त में यह शर्करा के स्तर को नियमित करने में मददगार होता है। फेफड़ों में क्षय रोग होने पर लहसुन के रस को रूई पर छिड़क कर रूई को नासाद्वारों पर बांध दें। लहसुन की गंध तथा गुणों को लेकर जो सांस फेफड़ों में जाएगी इससे क्षय दूर होगा। सभी प्रकार की खांसी के इलाज के लिए लहसुन अचूक औषधि है।

कुक्कर खांसी के इलाज के लिए विशेषकर लगभग 25 बूंदें लहसुन का रस अनार के शर्बत में मिलाकर पिएं। इससे शीघ्र लाभ होता है। गला बैठा हो या स्वर में खरखराहट हो तो गर्म पानी में लहसुन का रस घोलकर प्रतिदिन लगभग पांच मिनट गरारा करें। लहसुन भारतीय रसोई में प्रयोग किया जाने वाला एक प्रमुख मसाला है।

लहसुन चेहरे की रंगत को भी निखारता है।


इन पर ध्यान दें–

  • अगर आप को हाथ पैर में सुन्नता या अधिक कमजोरी महसूस होती है।
  • आंखों से दिखाई देने में कुछ परेशानी महसूस कर रहें हों।
  • आलस्य या सुस्ती अधिक महसूस कर रहें हों।
  • चलने फिरने में परेशानी महसूस कर रहें हों।
  • सर दर्द अचानक हो तेज
  • बोलने या कुछ भी समझने में दिक्कत या कमी महसूस कर रहें हों।

इन सारी चीजों में से कुछ भी आपको लगे तो तुरंत डॉक्टर की सहायता लें ये पक्षाघात(लकवा) के संकेत के लक्षण भी हो सकते हैं। इनमें से कुछ भी महसूस करें तो मरीज को अपना धीरज व हिम्मत नहीं खोना चाहिये। ऐसी स्थिति में मरीज के घर वालों का फर्ज बनता हा कि पक्षाघात के आक्रमण के पुरंत बाद ही उन्हें डॉक्टर के पास ले जाया जाये। इसके बाद आयुर्वेद में भी इस रोग से ठीक होने के कई कारगर नुस्खे हैं।


लहसुन की बदबू

अगर आपको लहसुन की गंध पसंद नहीं है कारण मुंह से बदबू आती है। मगर लहसुन खाना भी जरूरी है तो रोजमर्रा के लिये  आप लहसुन को छीलकर या पीसकर दही में मिलाकर खाये तो आपके मुंह से बदबू नहीं आयेगी।  लहसुन खाने के बाद इसकी बदबू से बचना है तो जरा सा गुड़ और सूखा धनिया मिलाकर मुंह में डालकर चूसें कुछ देर तक, बदबू बिल्कुल निकल जायेगी। परंतु अपने स्वास्थ को ध्यान में रखते हुऐ लहसुन जरूर खायें।


लहसुन से चिकित्सा पक्षाघात(लकवा) की-


औषधि नं-1

औषधि के लिये लहसुन बड़ी गांठ वाला जिसमें से अधिक रस निकाल सकें ले।

विधि- लहसुन की आठ कली लेकर छील लें फिर इसे बारीक चटनी की तरह पीस लें फिर गाय का दूध लेकर उबाल लें, अब थोड़ा सा दूध अलग कर लें उसमें शक्कर मिला दें, जब यह दूध हल्का गरम रह जाय तो इस दूध में लहसुन मिलाकर पी जायें, ऊपर से इच्छा अनुसार जितना चाहें दूध पियें। परंतु ध्यान रखें लहसुन कभी

खौलते दूध में न मिलावें वरना उसके गुण नष्ट हो जायेंगे। दिन में दो बार ये विधि करें। इस प्रकार दिन में दो बार इसका सेवन करें। तीन दिन तक दोनों समय लेने के बाद इसकी मात्रा बढ़ाकर 9 या 10 कलियां कर दें। एक हफ्ते बाद कम से कम 20 कली लहसुन लें। इसी तरह तीन बाद फिर बढ़ाकर 40 कली का रस दूध से लें। इसके बाद अब इनकी मात्रा घटाने का समय है जैसे-जैसे बढ़ाया वैसे-वैसे ही घटाते जाना है तीन-तीन दिन पर यानी-

  • पहली बार – 8 कली लहसुन की लें लेत रहें
  • बार तीन दिन बाद-10 कली लहसुन की लें लेते रहें
  • बार 1 सप्ताह बाद – 20 कली लहसुन की लें लेते रहें
  • बार 1 सप्ताह बाद- 40 कली लहसुन की लें लेते रहें

इसका सेवन करने से और भी लाभ है पेशाब खुलकर होगा।

दस्त साफ होने लगेगी शरीर की चेतना शक्ति बढ़ने लगेगी तथा पक्षाघात का असर धीरे-धीरे कम होने लगेगा। अगर उच्चरक्त चाप है तो यह प्रयोग काफी कारगर सिद्ध हो सकता है।


औषधि नं-2

मोटी पोथी वाला 1 मोटा दाना लहसुन का लेकर छीलकर पीस लें बारीक और इसे चाट लें ऊपर से गाय का दूध हल्का गर्म चीनी डालकर पी जायें। अब दूसरे दिन 2 लहसुन की चटनी चाट कर दूध पी जायें। तीसरे दिन तीन लहसुन, चौथे दिन चार कली इसी तरह  से ग्यारह दिन तक 11 लहसुन पीसकर चाटें व दूध पी जायें। अब बारहवें दिन से 1-1 कली लहसुन की घटाती जायें तथा सेवन की विधि वहीं होगी। एक लहसुन की संख्या आ जाने पर बंद कर दें पीना। इससे हाई ब्लड प्रेशर का असर कम होगा। पक्षाघात का प्रभाव कम होगा। सर का भारी पन ठीक होगा। नींद अच्छी आयेगी। दस्त खुलकर होगा। भूख अच्छी लगेगी। (अगर आप सामान्य तरीके से रोज लहसुन खायें तो इसका खतरा ही नहीं होगा।)


औषधि नं-3

लहसुन व शतावर- 7-8 कली लहसुन, शतावर का चूर्ण 1 तोला दोनों को खरल में डालकर घोंट लें, आधा किलो दूध में शक्कर मिलाकर लहसुन शतावर पिसा हुआ मिलाकर पी जायें इसे लेने पर हल्का सुपाच्य भोजन लें। शरीर के हर अंग का भारी पन ठीक होगा साथ पक्षाघात में फायदा होगा। इसे 31 दिन लगातार लें।


औषधि नं-4

लहसुन,शतावर चूर्ण, असगंध चूर्ण- 1 चाय का बड़ा चशतावर चूर्ण, उतनी ही मात्रा में असगंध चूर्ण दोनों चूर्ण को दूध में मिलाकर पियें साथ दोपहर के भोजन के साथ लहसुन लें। लहसुन की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाते जायें, रोटी, आंवला, लहसुन का प्रयोग भोजन में अवश्य करें। शरीर की मालिश भी करें इन सभी विधियों से पक्षाघात में जल्दी व सरलता से मरीज ठीक होता है।


औषधि नं-5

लहसुन छीलकर पीस लें 3-4 कली, फिर उसमें उतनी ही मात्रा में शहद मिला कर चाटें। धीरे-धीरे लहसुन की मात्रा बढ़ाते जायें 1-1 कली करके कम से कम 11-11 कली तक पहुंचे साथ बराबर मात्रा में शहद भी मिलाकर चाटें। साथ लहसुन का रस किसी तेल में मिलाकर उस प्रभावित हिस्से पर लेप, मालिश हल्के हाथ से करें। लहसुन के रस को थोड़ा गरम करके लगायें धीरे-धीरे काफी फायदा पहुंचेगा लहसुन से रक्त संचार ठीक तरह से होता है।


औषधि नं-6

दो पोथी पूरी मोटे दाने वाले पीसकर रस निकाल लें अब इसे चार तोला तिल के तेल या सरसों के तेल में मिलाकर पकायें, जब सिर्फ तेल रह जाये तो छानकर इस तेल से सुबह, शाम मालिश करें लकवा, वात रोग मिट जायेगा। अगर आप तिल का तेल इस्तेमाल करें ज्यादा अच्छा होगा।


औषधि नं-7

पक्षाघात के रोगी को आप लहसुन की चटनी को मख्खन के समभाग के साथ भी दे सकते हैं(लहसुन मख्खन बराबर मात्रा) में। यह सुरक्षित योग है इसे प्रातः सांय दोनों समय प्रयोग कर सकते हैं।

VN:F [1.7.8_1020]
Rating: 5.0/10 (97 votes cast)
लहसुन के बड़े बड़े गुण5.01097
3 Responses to “लहसुन के बड़े बड़े गुण”
  1. ranvir says:

    Very useful information but there is some problem in summers, when it is used it causes hotness in stomach which results in loss of weight.

    UN:F [1.7.8_1020]
    Rating: 0.0/5 (0 votes cast)
  2. Padma says:

    Ranvirji ,summer mein cum use karein.

    UA:F [1.7.8_1020]
    Rating: 0.0/5 (0 votes cast)
  3. Padma says:

    Ranvirji.USE small quantity in summer.

    UA:F [1.7.8_1020]
    Rating: 0.0/5 (0 votes cast)

Post a Comment



Redwing Solutions