डिसमेनोरिया क्या है? क्यों होता है

Tuesday, February 14th, 2012

कुछ महिलाएं डिसमेनोरिया से ग्रस्त होती हैं। इनमें से कुछ डिसमेनोरिया ग्रस्त किसी अन्य कारण या बीमारी की वजह से भी हो सकती है।मेंसेस, किशोरावस्था से शुरू होता है।और 50-52 तक की उम्र यानि रजोनिवृत्ति  तक रहता है अधिकांश महिलाओं में ंेंम्सेस से कुछ दिन पहले ही पेच तथा पेडू में दर्द शुरू हो जाता है जिससे उनकी दिनचर्या प्रभावित होती है।कईयों में मेंन्सेस के दौरारन काफी दर्द रोता है ।कभी कभी यह उम्र बढ़ने के साथ कम भी हो जाता है और बहुतों को गर्भावस्था के बाद बिल्कुल ठीक हो जाता है । डिसमेनोरिया की शिकार ज्यादातर वे महिलाएं होती है ं जो कम एक्टिव होती है या फिर और भी कई कारण हो सकते हैं।

images (4)

—डिसमेनोरियाडिसमेनोरिया

मेंन्सस के दिनों में अधिक कष्टदायक स्थिति का होना

  • जिन युवतियों में मेंन्सेस के दौरान दर्द होता है, परंतु प्रजनन अंगों में कोई रोग नहीं होता उनमें
  • इस कष्टदायक स्थिति का कारण और भी हो सकता है जैसे—
  • गर्भाशय से प्रास्टाग्लैन्डिन  रसायन अधिक मात्रा में बनने के कारण होता है,जो गर्भाशय को संकुचित करता है।इन महिलाओँ को प्रजनन चक्र में अंडा निकलते समय हल्काक दर्द होता है परंतु जो स्त्रियां व्यायाम नहीं करती है,आलसी जीवन बिताती हैं उन्हें काफी तकलीफ से गुजरना पड़ता हैं और उन्हें दवा का सहारा लेना पड़ता है।
  • दूसरे कुछ महिलाओं में डिसमेनोरिया का कारण यह भी हो सकता है  गर्भाशय में रसोली,फाइब्रायड़ से ग्रस्त हैं।प्रजनन अंगो में इंफेक्शन,अंडाशय में सिस्ट,ट्यूमर होने से भी।
  • पेडू ,कूल्हों ,जंघों में दर्द महसूस होताहै प्राय यह परेशानी मेंन्सेस शुरू होने से एक दो दिन पहले से शुरू हो जाता है।
  • मिचली,उल्टी,दस्त भी हो सकता है ।कुछ को पूरे शरीर में दर्द होता है,कुछ का दर्द कम होता जाता है कुछ का बढ़ता जाता है।इसे कन्वलसिवडिसमेनोरिया कहते हैं
  • जो महिलाएं कब्ज, पेट में गैस बनने की समस्या से ग्रस्त होती हैं उनमें डिसमेनोरिया की ज्यादा संभावना होती है।कुछ महिलाओं को मरोड के साथ दर्द होता है इसे स्पासमोडिक  डिसमेनोरिया कहते हैं।
  • कुछ महिलाओं मेंदर्द या रक्तस्त्राव रूक रूक कर होता है कभी ज्यादा कभी कम हो जाता है।पेट के निचले हिस्से से लेकर कमर तकदर्द  उठता है।जो जांघों तक फैलता है।गर्भाशय की मांसपेशियां में तेजी से संकुचन होता है जिससे रक्त वाहिनियों पर दबाव पड़ता है और रक्त प्रवाह कम हो जाता है।
  • गर्भाशय में रूकावट है, गर्भाशय ग्रीवा सकरी होने से या फिर ।गर्भाशय के पीछे झुके होने से स्त्राव निकलनें में दिक्कत होने के कारण ये समस्या हो सकती है।
  • कुछ महिलाएं कॉपर टी लगवाती है इससे भी डिसमेनोरिया होने की संभावना  बढ़ जाती है।
  • कुछ महिलाएं स्वभाव से डरी,सहमी,या तनावग्रस्त होती है इससे भी है डिसमेनोरिया ग्रस्त हो जाती हैं।

यदि डिसमेनोरिया से ग्रस्त हैं ,तो  क्या करें  —

  • मेंसेस शुरू होने पर किशोरियों या महिलाओं का मूड़ कुछ उदास व चिडचिडा सा हो जाता है इसका कारण है,शरीर ंें होने वाले इस्ट्रोजन और प्रोटोस्टेऱॉन हारमोन्स के स्तर में उतार- चढाव के कारण होता है.सो महिलाओं को उचित मात्रा में केल्शियम लेना चाहिये.एक दिन में कम से कम 1200 मिली ग्राम कैल्शियम की जरूरत होती है इस आवश्यकता को पूरी करने के लिये दूध तथा दूध से बनी चीजों का सेवन करे जिससे हार्मोन के स्तर का उतार चढाव कम होता है।इन दिनों किशोरियों को मुंहासे भी अधिक परेशान करते हैं यह ऐसा इस लिये होता है कारण एंड्रोजन नामक हार्मोन के उत्पादन में वृध्दि की वजह से होता हैयह त्वचा से ऑयल स्त्रवित करने का काम करता है और यह रोम छिद्रों को बंद कर देता है जिसकी वजह से मुंहासे निकलते हैं।अपनी चेहरे की त्वचा को साफ करते हैं लगातार यह काम मासिक शुरू होने के एक हफ्ते पहले से ही शूरू कर दें।
  • डिसमेनोरिया से जीवन में हर महिला कभी न कभी ग्रस्त होती ही है परंतु इसके और भी करण हो सकते है जिसका पता लगाने के लिये अवश्य डॉक्टरी परामर्श लें।
  • हर युवती को यौन शिक्षा देना अनिवार्य है जिसमें प्रजनन चक्र,मेंन्सेस,गर्भाधारण,गर्भनिरोधक उपाय,यौन रोगों की जानकारी आवश्यक है।
  • डिसमेनोरिया ग्रस्त युवति ,महिला,को  हर माह मेन्सेस शुरू होने से एक सप्ताह पहले से ही नमक कम खाना शुरू कर देना चाहिये।
  • पेट,पडू में दर्द होने से गरम पानी से स्नान करें,तथा पेडू की सेकाई करें।
  • युवती को एक्टिव रहना चाहिये।
  • पर्याप्त मात्रा में संतुलित भोजन करें,हरी साग सब्जियां,मौसमी फल का उचित मात्रा में सेवन करें
  • तनाव ,चिंता से दूर रहें।मेन्सस के संबं ध में गलत धारणा न पालें। नियमित मेन्सेस ही नारीत्व का प्रतीक है।रेगुलर मेंसेस यानि आप पूर्णतय स्वस्थ हैं।
  • लेटते समय पैरों के नीचे तकिया लगाकर सोयें
  • कमकिसी-किसी को मासिक धर्म के समय पेडू में दर्द एवं ऐठन होता है इसके और भी कई कारण हो सकते है। यदि अधिक तकलीफ होतो डॉक्टर की सलाह र ,पे़डू की हल्के हाथ से मालिश करें
  • इ न दिनों अधिक ठंडी चीजों का सेवन न करें
  • मेन्सस शुरू होने से दो चार दिन पहले से आधा चम्मच हल्दी फांक कर   गुनगुना पानी पी लें रूका हुआ मेंन्सस भी साफ हो जाता है अंदरूनी इंन्फेक्शन भी ठीक होगा हल्दी एंटीबायटिक होती है।
  • अंदरूनी अंगो की सफाई बराबर रखें।डीटॉल से अंडरगर्मेंट साफ करें।वरना इंन्फेक्शन के चांसेस बढ़ सकते हैं

किसी-किसी को मासिक धर्म के समय पेडू में दर्द एवं ऐठन होता है इसके और भी कई कारण हो सकते है। यदि अधिक तकलीफ होतो डॉक्टर की सलाह लें। कई बार घरेलू उपाय से भी ठीक हो सकता है।

उपाय

  • गुड, अजवाइन का हलवा बनाकर खाने से पेडू में होने वाला  दर्द एवं ऐठन तथा आने वाला मासिक धर्म ठीक हो सकता है।
  • मासिक धर्म के समय में होने वाली जांघों का दर्द हो, तो इन दिनों नीम के पत्ते 5 ग्राम अदरक का रस 10 ग्राम इसमें इतना ही पानी मिलाकर इस काढे को जरूरत अनुसार दो चार बार पियें।
  • अगर मासिक धर्मबिल्कुल न आता हो तो दो चम्मच गाजर का बीज(बजार में उपलब्ध होता है जहां सब्जियों के बीज मिलते हैं)तथा गुड़ एक गिलास पानी में उबालकर रोज सुबह शाम पियें।
    - 50 ग्राम सोंठ, गुड 30 ग्राम, 5 ग्राम  कुटी जौ, वायविडंग,(जड़ी बूटी की दुकान पर मिल जाता है) 1 गिलास पानी में उबाले काढ़ा बनाऐं। आधा-आधा कप, तीन-तीन घंटे बाद पियें। रूका हुआ मासिक स्त्राव शुरू हो जायेगा।
  • दो गिलास पानी में 4 चम्मच राई उबालकर पानी छान लें उससे कपड़ा भिगाकर पेट सेकें। इससे मासिक स्त्राव खुलकर होगा व दर्द भी कम होगा।
  • नारियल खाने से मासिक धर्म खुलकर होता है।
  • तुलसी की जड़ को छाया में सुखाकर पीसकर रख लें। इसे पावडर को चुटकी भर , पान में रखकर खाने से अनावश्यक रक्त स्त्राव(अधिक मात्रा में होने वाला) बंद होता है।
  • लड़कियों को मासिक धर्म के दिनों में सुबह भूखे पेट नींबू तथा नारंगी का रस पीने से पोटेशियम की कमी पूरी होती है। पेडू में दर्द होने पर सेंक करें।
  • भोजन में मांसाहार कम से कम करें।
  • इन दिनों में अधिक तेल खटाई, मिर्च मसाला न खायें। खाली पेट दूध न पियें पेट में ऐंठन होगी।
  • हल्दी की 2-3 गांठ सिल पर पीस लें। 1 गिलास गाय के दूध में गुड़ तथा थोडी हल्दी पावडर  डालकर स्टील के बर्तन में 2-3 उबाल दें और ठंडा कर पी जायें। मासिक धर्म खुलकर आयेगा। इसे एक माह तक पियें।

बीच मे बंद हुआ मासिक धर्म को फिर से चालू करने के लिये एक सरल प्रयोग

  • मूली ,गाजर तथा मेथी  के बीज ,इन तीनों को कूट पीस कर  छानकर रख लें, इस चूर्ण को चाय का एक बडा चम्मच खाकर उपर से गरम पानी पिये  इस चूर्ण को तीन चार दिन तक लगातार सेवन करते रहें रूका हुआ मासिक धर्म वापस शुरू हो जाता है
  • स्त्री रोग- मासिक धर्म, श्वेत प्रदर यदि मासिक धर्म ठीक से नहीं आता तो एक ग्लास पानी में तुलसी बीज को उबाले, आधा रह जाए तो इस काढ़े को पी जाएं, मासिक धर्म खुलकर होगा।
  • मासिक धर्म के दौरान यदि कमर में दर्द भी हो रहा हो तो एक चम्मच तुलसी का रस लें।
  • तुलसी का रस 10 ग्राम चावल के माड़ के साथ पिए सात दिन। प्रदर रोग ठीक होगा। इस दौरान दूध भात ही खाएं।
  • तुलसी के बीज पानी में रात को भिगो दें। सुबह मसलकर छानकर मिश्री में मिलाकर पी जाएं। प्रदर रोग ठीक होगा।

लें। कई बार घरेलू उपाय से भी ठीक हो सकता है।

उपाय

  • गुड, अजवाइन का हलवा बनाकर खाने से पेडू में होने वाला  दर्द एवं ऐठन तथा आने वाला मासिक धर्म ठीक हो सकता है।
  • मासिक धर्म के समय में होने वाली जांघों का दर्द हो, तो इन दिनों नीम के पत्ते 5 ग्राम अदरक का रस 10 ग्राम इसमें इतना ही पानी मिलाकर इस काढे को जरूरत अनुसार दो चार बार पियें।
  • अगर मासिक धर्मबिल्कुल न आता हो तो दो चम्मच गाजर का बीज(बजार में उपलब्ध होता है जहां सब्जियों के बीज मिलते हैं)तथा गुड़ एक गिलास पानी में उबालकर रोज सुबह शाम पियें।
    - 50 ग्राम सोंठ, गुड 30 ग्राम, 5 ग्राम  कुटी जौ, वायविडंग,(जड़ी बूटी की दुकान पर मिल जाता है) 1 गिलास पानी में उबाले काढ़ा बनाऐं। आधा-आधा कप, तीन-तीन घंटे बाद पियें। रूका हुआ मासिक स्त्राव शुरू हो जायेगा।
  • दो गिलास पानी में 4 चम्मच राई उबालकर पानी छान लें उससे कपड़ा भिगाकर पेट सेकें। इससे मासिक स्त्राव खुलकर होगा व दर्द भी कम होगा।
  • नारियल खाने से मासिक धर्म खुलकर होता है।
  • तुलसी की जड़ को छाया में सुखाकर पीसकर रख लें। इसे पावडर को चुटकी भर , पान में रखकर खाने से अनावश्यक रक्त स्त्राव(अधिक मात्रा में होने वाला) बंद होता है।
  • लड़कियों को मासिक धर्म के दिनों में सुबह भूखे पेट नींबू तथा नारंगी का रस पीने से पोटेशियम की कमी पूरी होती है। पेडू में दर्द होने पर सेंक करें।
  • भोजन में मांसाहार कम से कम करें।
  • इन दिनों में अधिक तेल खटाई, मिर्च मसाला न खायें। खाली पेट दूध न पियें पेट में ऐंठन होगी।
  • हल्दी की 2-3 गांठ सिल पर पीस लें। 1 गिलास गाय के दूध में गुड़ तथा थोडी हल्दी पावडर  डालकर स्टील के बर्तन में 2-3 उबाल दें और ठंडा कर पी जायें। मासिक धर्म खुलकर आयेगा। इसे एक माह तक पियें।

बीच मे बंद हुआ मासिक धर्म को फिर से चालू करने के लिये एक सरल प्रयोग

  • मूली ,गाजर तथा मेथी  के बीज ,इन तीनों को कूट पीस कर  छानकर रख लें, इस चूर्ण को चाय का एक बडा चम्मच खाकर उपर से गरम पानी पिये  इस चूर्ण को तीन चार दिन तक लगातार सेवन करते रहें रूका हुआ मासिक धर्म वापस शुरू हो जाता है
  • स्त्री रोग- मासिक धर्म, श्वेत प्रदर यदि मासिक धर्म ठीक से नहीं आता तो एक ग्लास पानी में तुलसी बीज को उबाले, आधा रह जाए तो इस काढ़े को पी जाएं, मासिक धर्म खुलकर होगा।
  • मासिक धर्म के दौरान यदि कमर में दर्द भी हो रहा हो तो एक चम्मच तुलसी का रस लें।
  • तुलसी का रस 10 ग्राम चावल के माड़ के साथ पिए सात दिन। प्रदर रोग ठीक होगा। इस दौरान दूध भात ही खाएं।
  • तुलसी के बीज पानी में रात को भिगो दें। सुबह मसलकर छानकर मिश्री में मिलाकर पी जाएं। प्रदर रोग ठीक होगा।
VN:F [1.7.8_1020]
Rating: 5.0/10 (2 votes cast)
डिसमेनोरिया क्या है? क्यों होता है5.0102

Tags:

Post a Comment



Redwing Solutions