कान

Sunday, February 14th, 2010

कान के दो भाग होते हैं

बाहरी कान जो हमें दिखाई देता है और उसकी बनावट हमारे चेहरे के अनुसार होती है, साधारणतया कान की चमड़ी बाहर की तरफ बढ़ती है, और मैल आदि को बाहर फेंकती जाती है।

बाहरी कान में होने वाली परेशानियाँ
कान में चोट लगना
बाहर के कान में कट जाना, खून जम जाना या नली में फ्रेक्चर आदि। इससे कान में अत्यधिक दर्द होता है, क्योंकि यहाँ की चमड़ी कान के कॉर्टीलेज से चिपकी हुई होती है।

भीतरी कान का हिस्सा जो हमें दिखाई नहीं देता परंतु उसमें भी तमाम तरह की परेशानियां हो जाती हैं।

कान में कीड़ा,या किसी वस्तुओं का चले जाना या डाला जाना। कई बार बच्चे खेलते-खेलते छोटी-छोटी वस्तुओं को कान में डाल लेते हैं। उन्हें विशेष औजारों द्वारा निकाला जाता है। अगर वस्तु अधिक अंदर हो तो बच्चे को बेहोश कर दूरबीन द्वारा भी इसे निकाल सकते हैं। कई बार सीरिजिंग द्वारा भी निकाल सकते हैं। अगर कीड़ा, मच्छर, झिंगुर, कान में गया हो तो कान में कुछ बूँद तेल डालने से कीड़ा मर जाता है, क्योंकि उसे ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और फिर उसे आसानी से निकाला जा सकता है।
कान में संक्रमण
कान को किसी नुकीली चीज से खुजलाने से या कान छेदने  से कान में संक्रमण हो सकता है। कुछ वस्तुएँ जैसे क्रीम, इत्र कान में उपयोग में आने वाली दवाइयों की एलर्जी से भी संक्रमण होता है। कान लाल हो जाता है, खुजली आती है एवं दर्द हो सकता है।लोगों को इन चीजों का उपयोग न करने की सलाह दी जाती है।

यूं तो कान से जुड़ी बीमारी का उम्र से कोई विशेष संबंध नहीं है, क्योंकि यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। फिर भी 50 वर्ष की उम्र से अधिक व्यक्तियों में कान से जुड़ी समस्याएं बड़े पैमाने पर देखने को मिलती हैं। इसलिए ठंड में बुजुर्गों को कान के प्रति ज्यादा सजग रहना चाहिए।
कान का दर्द – ठंडी हवा या कान में मैल जमने से या फिर फुंसी होने से कान में दर्द हो तो अदरक का रस कपड़े से छानकर, गुनगुना कर तीन-चार बूंद कान में डालें दिन भर में तीन चार बार। यदि कान में सांय-सांय कर रहा हो तो थोड़ा-थोड़ा सोंठ, गुड़, घी मिलकर खाने से ठीक हो जायेगा।

-आम के पत्ते पीसकर उसका रस हल्का गर्म कर कान में तीन-चार बूंद डालें। दर्द     ठीक होगा।

-कान में कीडे-मकोड़ेका चले जानाअजवाइन के पत्तों के रस को कान में डालने से कान में चले गये कीडे-मकोड़े समाप्त हो जाते है।

-बहरापनअजवाइन के तेल को रोजाना कान में डालने से बहरापन दूर हो जाता है।
-कान को साउंड प्रदूषण से बचायें।

कान का बहना

मवाद जैसा या पानी कान से  बहना,  बहाव तीव्र या पुराना हो सकता है।

कान बहना  बच्चों, किशोरों , किशोरियों, कुपोषित बच्चों गंदी जगहों पर रहने वाले लोग  में आम हैं।

कारण:
सामान्‍य सर्दी-जुकाम के साथ इनफेक्श का होना।
लक्षण:

- एक या दोनों कानों में दर्द

-बदबूदार  बहाव

-  बुखार

सावधानियां:

  • कान में बिना मतलब  तेल न डालें
  • स्‍नान करते समय हमेशा दोनों कानों को बचाए या रूई लगायें
  • जब भी बहाव हो, कान साफ करने के लिये मेडिकेटेड इयर बड इस्तेमाल करें
  • ई.एन.टी चिकित्सक से उपचार के लिए उचित परामर्श लें
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