हर बारिश के मौसम में या फिर ठीक इसके बाद आंखों की बीमारी कंजक्टिवाइटिस(आई इंफेक्शन) का प्रकोप देखने को मिलता ही है.चिकित्सकों के अनुसार इस बीमारी में कुछ बातों का खयाल रखा जाय तो इससे बचाव अवश्य हो सकता है
कंजक्टिवाइटिस, आजकल का मौसम तेज धूप के बाद बारिष और उसके बाद फिर तेज धूप का असर हमारी आंखों पर सीधा पड़ता है.
आंख हमारे शरीर का सबसे नाजुक और संवेदनशील अंग है। इसलिए इनकी देखभाल में सबसे ज्यादा सावधानी की जरूरत होती है। खासतौर पर बारिश के मौसम में। बारिश का मौसम कंजक्टिवाइटिस के लिए सबसे सही समय होता है। प्रभावित व्यक्ति को हर समय यही लगता रहता है कि उसकी आंख में रेत जैसा कुछ गड़ रहा है। इस मौसम में थोड़ी सी लापरवाही आंखों को काफी नुकसान पहुंचा सकती है। आंखों को रगडे नहीं.
कंजक्टिवाइटिस बैक्टीरिया, वायरल इंफेक्शन यह एक या दोनों आखों में हो सकती है। इसमें आखों में खुजली, उनका लाल हो जाना, पानी बहना और आखों में सूजन आ जाती है। यह बीमारी एक आख से शुरू होकर दूसरे में पहुंचती है। आंख रोग विशेषज्ञ चिकित्सक डा. सुनील कुमार बताते हैं कि कंजक्टिवाइटिस दो प्रकार का होता है।
कंजक्टिवाइटिस यह तापमान के तेजी से बदलने यानी ज्यादा या कम होने पर होता है। हालाकि यह अपने आप चार-पाच दिनों में ठीक हो जाता है। दूसरा है बैक्टीरियल कंजक्टिवाइटिस। यह बच्चों को जल्द गिरफ्त में ले लेता है।
. जुलाई से सितंबर तक का मौसम आंखों के प्रतिकूल होता है। नेत्र विशेषज्ञ डा. अतुल सूद कहते हैं, कि बरसात का मौसम और तेज धूप के साथ उमस भरी गर्मी से वातावरण चारों ओर से प्रदूषित हो जाता है।
बरसात के बाद जब धूप निकलती है, तो जलभराव वाले स्थान सूखने लगते हैं। इस दौरान गंदगी वाले स्थानों से हवा के साथ कण भी उड़ते हैं। जिसके चलते आखों में वायरल इंफेक्शन हो सकता है। यह
मौसम वैक्टीरिया और वायरल के लिए एकदम अनुकूल है।
कंजंक्टिवाइटिस को बोलचाल की भाषा में आंख आना कहते हैं। इसकी वजह से आंखें लाल, सूजन युक्त, चिपचिपी [कीचड़युक्त] होने के साथ-साथ उसमें बाल जैसी चुभने की समस्याएं हो सकती हैं। आमतौर पर बैक्टीरिया या वायरस के इंफेक्शन अथवा एलर्जी के कारण यह तकलीफ होती है।
प्रमुख तीन प्रकार के इंफक्शन होते हैं
बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस -दोनों आंखों से बहुत अधिक कीचड़ आना।
समाधान — डॉक्टरी सलाह से एंटीबायोटिक ड्रॉप्स या ऑइंटमेंट का इस्तेमाल करें।
वायरल कंजंक्टिवाइटिस- कीचड़युक्त पानी काम आना, एक आंख से पानी आना।
समाधान— गुनगुने या फिर नमक मिले पानी अथवा बोरिक एसिड पाउडर से दिन में कई बार आंखों को धोएं। डॉक्टरी सलाह लें।
एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस: दोनों आंखों से पानी आना, खुजली होना और लाली आना
समाधान— वायरल कंजंक्टिवाइटिस में बताए उपायों पर अमल करें।
बैक्टीरियल और वायरल कंजंक्टिवाइटिस बहुत तेजी से फैलने वाला रोग है।
कंजक्टिवाइटिस की पहचान
• सबसे आम लक्षण है आंखों में जलन और रेत कणों के अंदर होने का एहसास होना। अंदरुनी पलके और आंखों के किनारे तक लाल सुर्ख हो जाती हैं। आंखों से लगातार पानी भी गिरता है। सुबह सोकर उठने पर दोनों पलकें आपस में चिपकी हुई मिल सकती हैं। कई लोगों की आंखें सूज जाती हैं और वे तेज रोशनी के प्रति संवेदनशील हो जाती हैं।
इन बातों का रखें ख्याल
• कंजक्टिवाइटिस होने पर डाक्टर की सलाह जरूर लें। आखों को दिन में तीन से चार बार धोएं। घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाए डाक्टर की सलाह लें। याद रखें समय पर इसका इलाज नहीं किया गया तो कार्निया में जख्म हो सकता है जो घातक साबित हो सकता है। कंजक्टिवाइटिस संक्रामक बीमारी है। यानी सम्पर्क में आने पर यह एक व्यक्ति से दूसरे में फैलती है।
• परिवार में जो व्यक्ति संक्रमित है, उसका सामान अलग रखें। आंखों को साफ करने के लिए साफ तौलिया या रुमाल का इस्तेमाल करें। घर के बाहर निकलने से पहले धूप का चश्मा लगाएं। यह न सिर्फ धूप से बचाता है बल्कि धुंए और गंदगी से होने वाली एलर्जी से भी रक्षा करता है। आखों में दवा डालने के पहले और बाद में हाथों को अच्छी तरह धो लें। बार-बार अपनी आखों को हाथ से न छुएं। आंखों को हमेशा साफ और ठंडे पानी से धोएं
कम रोशनी में पढ़ाई न करें। आख में कुछ गिर जाने पर उसे मले नहीं। उसे साफ पानी से धुले। आराम न मिले तो तुरंत चिकित्सक की सलाह लें।
लक्षण -
वायरल कंजंक्टिवाइटिस- आंख में पानी आना,इरिटेशन होना,आंखे लाल होना,आमतौर पर एक आंख से शुरू होता है और दूसरी आंख में भी आसानी से हो जाता है.
एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस- इसमें आखों से लगातार आंसू आना,इचिंग होना तथा सूजन रहती है.
बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस-आंखों में सूजन ,पानी आना, लाल होना सुबह आंखों का चिपक जाना
आमतौर पर इनका कोई इलाज नहीं होता यह एक कॉमन कोल्ड की तरह ही होता है आई ड्रॉप इस्तमाल करें.
बचाव के उपाय
आई फ्लू होने पर चश्मे का प्रयोग करें।
किसी व्यक्ति से हाथ नहीं मिलाना चाहिए।
आंखों को हाथ से नहीं रगड़ना चाहिए।
यदि बच्चों के आंख में हो गया हो, तो उसे स्कूल नहीं भेजना चाहिए।
आंखों को तीन-चार बार गुनगुने पानी से धोना चाहिए।
तीन-चार दिन रोगी को आराम करना चाहिए धूप में बाहर न निकलें।
हाथों को बार बार साबुन से धोय
किसी भी संक्रमक चीज को छूने के बाद जैसे(फोन ,टीवी रिमोट,दरवाजे इत्यादि )छूने पर हाथ धोकर ही खाना खायें
इस सीजन में स्वीमिंग करने से बचें.
कंजक्टिवाइटिस(आई इंफेक्शन)
हर बारिश के मौसम में या फिर ठीक इसके बाद आंखों की बीमारी कंजक्टिवाइटिस(आई इंफेक्शन) का प्रकोप देखने को मिलता ही है.चिकित्सकों के अनुसार इस बीमारी में कुछ बातों का खयाल रखा जाय तो इससे बचाव अवश्य हो सकता है
कंजक्टिवाइटिस, आजकल का मौसम तेज धूप के बाद बारिष और उसके बाद फिर तेज धूप का असर हमारी आंखों पर सीधा पड़ता है.
आंख हमारे शरीर का सबसे नाजुक और संवेदनशील अंग है। इसलिए इनकी देखभाल में सबसे ज्यादा सावधानी की जरूरत होती है। खासतौर पर बारिश के मौसम में। बारिश का मौसम कंजक्टिवाइटिस के लिए सबसे सही समय होता है। प्रभावित व्यक्ति को हर समय यही लगता रहता है कि उसकी आंख में रेत जैसा कुछ गड़ रहा है। इस मौसम में थोड़ी सी लापरवाही आंखों को काफी नुकसान पहुंचा सकती है। आंखों को रगडे नहीं.
कंजक्टिवाइटिस बैक्टीरिया, वायरल इंफेक्शन यह एक या दोनों आखों में हो सकती है। इसमें आखों में खुजली, उनका लाल हो जाना, पानी बहना और आखों में सूजन आ जाती है। यह बीमारी एक आख से शुरू होकर दूसरे में पहुंचती है। आंख रोग विशेषज्ञ चिकित्सक डा. सुनील कुमार बताते हैं कि कंजक्टिवाइटिस दो प्रकार का होता है।
कंजक्टिवाइटिस यह तापमान के तेजी से बदलने यानी ज्यादा या कम होने पर होता है। हालाकि यह अपने आप चार-पाच दिनों में ठीक हो जाता है। दूसरा है बैक्टीरियल कंजक्टिवाइटिस। यह बच्चों को जल्द गिरफ्त में ले लेता है।
जुलाई से सितंबर तक का मौसम आंखों के प्रतिकूल होता है। नेत्र विशेषज्ञ डा. अतुल सूद कहते हैं, कि बरसात का मौसम और तेज धूप के साथ उमस भरी गर्मी से वातावरण चारों ओर से प्रदूषित हो जाता है।
बरसात के बाद जब धूप निकलती है, तो जलभराव वाले स्थान सूखने लगते हैं। इस दौरान गंदगी वाले स्थानों से हवा के साथ कण भी उड़ते हैं। जिसके चलते आखों में वायरल इंफेक्शन हो सकता है। यह
मौसम वैक्टीरिया और वायरल के लिए एकदम अनुकूल है।
कंजंक्टिवाइटिस को बोलचाल की भाषा में आंख आना कहते हैं। इसकी वजह से आंखें लाल, सूजन युक्त, चिपचिपी [कीचड़युक्त] होने के साथ-साथ उसमें बाल जैसी चुभने की समस्याएं हो सकती हैं। आमतौर पर बैक्टीरिया या वायरस के इंफेक्शन अथवा एलर्जी के कारण यह तकलीफ होती है।
प्रमुख तीन प्रकार के इंफक्शन होते हैं
बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस -दोनों आंखों से बहुत अधिक कीचड़ आना।
समाधान — डॉक्टरी सलाह से एंटीबायोटिक ड्रॉप्स या ऑइंटमेंट का इस्तेमाल करें।
वायरल कंजंक्टिवाइटिस- कीचड़युक्त पानी काम आना, एक आंख से पानी आना।
समाधान— गुनगुने या फिर नमक मिले पानी अथवा बोरिक एसिड पाउडर से दिन में कई बार आंखों को धोएं। डॉक्टरी सलाह लें।
एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस: दोनों आंखों से पानी आना, खुजली होना और लाली आना
समाधान— वायरल कंजंक्टिवाइटिस में बताए उपायों पर अमल करें।
बैक्टीरियल और वायरल कंजंक्टिवाइटिस बहुत तेजी से फैलने वाला रोग है।
कंजक्टिवाइटिस की पहचान
• सबसे आम लक्षण है आंखों में जलन और रेत कणों के अंदर होने का एहसास होना। अंदरुनी पलके और आंखों के किनारे तक लाल सुर्ख हो जाती हैं। आंखों से लगातार पानी भी गिरता है। सुबह सोकर उठने पर दोनों पलकें आपस में चिपकी हुई मिल सकती हैं। कई लोगों की आंखें सूज जाती हैं और वे तेज रोशनी के प्रति संवेदनशील हो जाती हैं।
इन बातों का रखें ख्याल
• कंजक्टिवाइटिस होने पर डाक्टर की सलाह जरूर लें। आखों को दिन में तीन से चार बार धोएं। घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाए डाक्टर की सलाह लें। याद रखें समय पर इसका इलाज नहीं किया गया तो कार्निया में जख्म हो सकता है जो घातक साबित हो सकता है। कंजक्टिवाइटिस संक्रामक बीमारी है। यानी सम्पर्क में आने पर यह एक व्यक्ति से दूसरे में फैलती है।
• परिवार में जो व्यक्ति संक्रमित है, उसका सामान अलग रखें। आंखों को साफ करने के लिए साफ तौलिया या रुमाल का इस्तेमाल करें। घर के बाहर निकलने से पहले धूप का चश्मा लगाएं। यह न सिर्फ धूप से बचाता है बल्कि धुंए और गंदगी से होने वाली एलर्जी से भी रक्षा करता है। आखों में दवा डालने के पहले और बाद में हाथों को अच्छी तरह धो लें। बार-बार अपनी आखों को हाथ से न छुएं। आंखों को हमेशा साफ और ठंडे पानी से धोएं
कम रोशनी में पढ़ाई न करें। आख में कुछ गिर जाने पर उसे मले नहीं। उसे साफ पानी से धुले। आराम न मिले तो तुरंत चिकित्सक की सलाह लें।
लक्षण -
वायरल कंजंक्टिवाइटिस- आंख में पानी आना,इरिटेशन होना,आंखे लाल होना,आमतौर पर एक आंख से शुरू होता है और दूसरी आंख में भी आसानी से हो जाता है.
एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस- इसमें आखों से लगातार आंसू आना,इचिंग होना तथा सूजन रहती है.
बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस-आंखों में सूजन ,पानी आना, लाल होना सुबह आंखों का चिपक जाना
आमतौर पर इनका कोई इलाज नहीं होता यह एक कॉमन कोल्ड की तरह ही होता है आई ड्रॉप इस्तमाल करें.
बचाव के उपाय
आई फ्लू होने पर चश्मे का प्रयोग करें।
किसी व्यक्ति से हाथ नहीं मिलाना चाहिए।
आंखों को हाथ से नहीं रगड़ना चाहिए।
यदि बच्चों के आंख में हो गया हो, तो उसे स्कूल नहीं भेजना चाहिए।
आंखों को तीन-चार बार गुनगुने पानी से धोना चाहिए।
तीन-चार दिन रोगी को आराम करना चाहिए धूप में बाहर न निकलें।
हाथों को बार बार साबुन से धोय
किसी भी संक्रमक चीज को छूने के बाद जैसे(फोन ,टीवी रिमोट,दरवाजे इत्यादि )छूने पर हाथ धोकर ही खाना खायें
इस सीजन में स्वीमिंग करने से बचें.






